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ते प्र॒त्नासो॒ व्यु॑ष्टिषु॒ सोमा॑: प॒वित्रे॑ अक्षरन् । अ॒प॒प्रोथ॑न्तः सनु॒तर्हु॑र॒श्चित॑: प्रा॒तस्ताँ अप्र॑चेतसः ॥

English Transliteration

te pratnāso vyuṣṭiṣu somāḥ pavitre akṣaran | apaprothantaḥ sanutar huraścitaḥ prātas tām̐ apracetasaḥ ||

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Pad Path

ते । प्र॒त्नासः॑ । विऽउ॑ष्टिषु । सोमाः॑ । प॒वित्रे॑ । अ॒क्ष॒र॒न् । अ॒प॒ऽप्रोथ॑न्तः । स॒नु॒तः । हु॒रः॒ऽचितः॑ । प्रा॒तरिति॑ । तान् । अप्र॑ऽचेतसः ॥ ९.९८.११

Rigveda » Mandal:9» Sukta:98» Mantra:11 | Ashtak:7» Adhyay:4» Varga:24» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:11


ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (ते) तुम्हारे (प्रत्नासः) स्वाभाविक (सोमाः) सौम्य स्वभाव (पवित्रे) पवित्र अन्तःकरण में (अक्षरन्) प्रवाहित होते हैं, (अप्रचेतसः) अज्ञानी पुरुष (हुरश्चितः) जो कुटिल चित्तवाले हैं, (तान्) उनको आप प्रवाहित नहीं करते, क्योंकि वह (अपप्रोथन्तः) हिंसक हैं ॥११॥
Connotation: - परमात्मा का आनन्द सौम्य स्वभाववाले ही भोग सकते हैं, कुटिल चित्तवाले नहीं ॥११॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अपप्रोथन्तः हुरश्चितः

Word-Meaning: - (ते) = वे (व्युष्टिषु) = [prosperity] ऐश्वर्यों के निमित्त (प्रत्नासः) = सदा से चले आ रहे, अर्थात् सदा ऐश्वर्यों का कारण बनते हुए (सोमाः) = सोमकण (पवित्रे) = पवित्र हृदय वाले पुरुष में (अक्षरन्) = क्षरित होते हैं। इसके शरीर में ही इन सोमों का व्यापन होता है, जो ऐश्वर्यों का साधन बनते हैं। ये सोम (प्रातः) = प्रात:काल ही (सनुतः) = अन्तर्हित, छिपकर मन में निवास करनेवाली, (हुरश्चितः) = कुटिलता से संचय की वृत्तियों को तथा (तान्) = उन (अप्रचेतसः) = नासमझी व अज्ञान की वृत्तियों को (अपप्रोथन्तः) = निराकृत करते हैं, सुदूर विनष्ट करते हैं। सोमरक्षण से कुटिलभाव व अज्ञान नष्ट होता है ।
Connotation: - भावार्थ- पवित्र हृदय वाले पुरुष में रक्षित होकर सोम ऐश्वर्यों का कारण बनते हैं । ये कौटिल्य व अज्ञान को हमारे से दूर करते हैं ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (ते) तव (प्रत्नासः) स्वाभाविकाः (सोमाः) सौम्यगुणाः (व्युष्टिषु) यज्ञेषु (पवित्रे) पवित्रेऽन्तःकरणे (अक्षरन्) प्रवहन्ति (अप्रचेतसः) ये चाज्ञानिनः (हुरश्चितः) कुटिलचित्ताः (तान्) तान्सर्वान् (अपप्रोथन्तः) हिंसकान् न प्रवाहयति भवान् ॥११॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Those eternal, natural and universal vibrations of divine love and grace flow and beatify the human soul in the purity of heart core in the holy light of the dawn, subduing, expelling and destroying those crooked and clandestine forces of evil, darkness and ignorance of the human mind.