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ए॒ष वि॑श्व॒वित्प॑वते मनी॒षी सोमो॒ विश्व॑स्य॒ भुव॑नस्य॒ राजा॑ । द्र॒प्साँ ई॒रय॑न्वि॒दथे॒ष्विन्दु॒र्वि वार॒मव्यं॑ स॒मयाति॑ याति ॥

English Transliteration

eṣa viśvavit pavate manīṣī somo viśvasya bhuvanasya rājā | drapsām̐ īrayan vidatheṣv indur vi vāram avyaṁ samayāti yāti ||

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Pad Path

ए॒षः । वि॒श्व॒ऽवित् । प॒व॒ते॒ । म॒नी॒षी । सोमः॑ । विश्व॑स्य । भुव॑नस्य । राजा॑ । द्र॒प्सान् । ई॒रय॑न् । वि॒दथे॑षु । इन्दुः॑ । वि । वार॑म् । अव्य॑म् । स॒मया॑ । अति॑ । या॒ति॒ ॥ ९.९७.५६

Rigveda » Mandal:9» Sukta:97» Mantra:56 | Ashtak:7» Adhyay:4» Varga:22» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:6» Mantra:56


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (एषः) उक्त परमात्मा (विश्ववित्) सर्वज्ञ है, (पवते) सबको पवित्र करनेवाला है, (मनीषी) सूक्ष्म से सूक्ष्म शक्तियों का प्रेरक है, (सोमः) वह सर्वोत्पादक परमात्मा (विश्वस्य) सम्पूर्ण (भुवनस्य) लोकों का (राजा) प्रकाशक है, (इन्दुः) वह प्रकाशस्वरूप परमात्मा (विदथेषु) ज्ञानयज्ञों में (द्रप्सान्) ज्ञानों की (ईरयन्) प्रेरणा करता हुआ (अव्यम्) रक्षायोग्य (वारम्) वरणीय पुरुष को (समयाति, याति) अतिसंनिहित प्राप्त होता है ॥५६॥
Connotation: - जो परमात्मज्ञान के अधिकारी हैं, परमात्मा उन्हीं को प्राप्त होता है, अन्यों को नहीं ॥५६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

विश्ववित् मनीषी

Word-Meaning: - (एषः) = यह (सोम) = वीर्य (विश्ववित्) = सर्व पदार्थों का ज्ञान प्राप्त करनेवाला, (मनीषी) = बुद्धिमान् (पवते) - हमें प्राप्त होता है। यही ज्ञानादि का ईंधन बनता है, सो सब पदार्थों के ज्ञान का साधन है। बुद्धि की सूक्ष्मता इसी पर निर्भर करती है। यह सोम (विश्वस्य भुवनस्य) = सम्पूर्ण भुवन का, शरीर के अंग-प्रत्यंग का राजा दीप्त करनेवाला है। यह (इन्दुः) = शक्तिशाली सोम (विदथेषु) = ज्ञानयज्ञों के निमित्त (द्रप्सान्) = अपने कणों को [Drops] (ईरयन्) = मस्तिष्क की ओर प्रेरित करता हुआ (वारम्) = वासनाओं का वारण करनेवाले (अव्यं) = रक्षकों में उत्तम पुरुष को (समया) = समीपता से (वि अतियाति) = विशेषतया खूब प्राप्त होता है ।
Connotation: - भावार्थ - यह सोम ज्ञानाग्नि को दीप्त करता है । सब पदार्थों के ज्ञान का साधन बनता है । बुद्धि को सूक्ष्म बनाता है। वासनाओं को रोकनेवाले को यह प्राप्त होता है ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (एषः) अयं परमात्मा (विश्ववित्) सर्वज्ञः (पवते) पुनाति च सर्वान् (मनीषी) सूक्ष्मशक्तिप्रेरकः (सोमः) सर्वोत्पादकः स (विश्वस्य, भुवनस्य) अखिललोकानां (राजा) प्रकाशकः (इन्दुः) प्रकाशमयः सः (विदथेषु) ज्ञानवद्यज्ञेषु (द्रप्सान्) ज्ञानानि (ईरयन्) प्रेरयन् (अव्यं) रक्षार्हं (वारं) वरणीयं पुरुषं (समया, अति, याति) अत्यन्तान्तिकं प्राप्नोति ॥५६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - This Soma knows, holds and consecrates the world as a holy place for life. Omniscient and all- sentient, it is the refulgent ruler of the entire universe. Spirit of light, beauty and grace of generosity, inspiring and energising perception and awareness of the holy performers in yajnas, it moves and enlightens the chosen protected soul, abides there and moves on.