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वृ॒ष्टिं दि॒वः श॒तधा॑रः पवस्व सहस्र॒सा वा॑ज॒युर्दे॒ववी॑तौ । सं सिन्धु॑भिः क॒लशे॑ वावशा॒नः समु॒स्रिया॑भिः प्रति॒रन्न॒ आयु॑: ॥

English Transliteration

vṛṣṭiṁ divaḥ śatadhāraḥ pavasva sahasrasā vājayur devavītau | saṁ sindhubhiḥ kalaśe vāvaśānaḥ sam usriyābhiḥ pratiran na āyuḥ ||

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Pad Path

वृ॒ष्टिम् । दि॒वः । श॒तऽधा॑रः । प॒व॒स्व॒ । स॒ह॒स्र॒ऽसाः । वा॒ज॒ऽयुः । दे॒वऽवी॑तौ । सम् । सिन्धु॑ऽभिः । क॒लशे॑ । वा॒व॒शा॒नः । सम् । उ॒स्रिया॑भिः । प्र॒ऽति॒र॑न् । नः॒ । आयुः॑ ॥ ९.९६.१४

Rigveda » Mandal:9» Sukta:96» Mantra:14 | Ashtak:7» Adhyay:4» Varga:8» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:5» Mantra:14


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (शतधारः) आप अनन्तशक्तियुक्त हैं और (दिवः) द्युलोक से (वृष्टिम्) वृष्टि (सं पवस्व) से पवित्र करें। (देववीतौ) यज्ञों में (वाजयुः) अनेक प्रकार के बलों को प्राप्त हैं और (सिन्धुभिः) प्रेम के भावों से (कलशे) हमारे अन्तःकरण में (सं वावसानः) अच्छी प्रकार वास करते हुए (उस्रियाभिः) ज्ञानरूप शक्तियों से (नः) हमारी (आयुः) उमर को (प्रतिरन्) बढ़ायें ॥१४॥
Connotation: - जो पुरुष परमात्मा के ज्ञानविज्ञानादि भावों को धारण करके अपने को योग्य बनाते हैं, परमात्मा उनके ऐश्वर्य्य को अवश्यमेव बढ़ाता है ॥१४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

शक्ति- दिव्यगुण- ज्ञान व दीर्घजीवन

Word-Meaning: - हे सोम! (शतधारः) = सैकड़ों प्रकार से धारण करनेवाला तू (दिवः वृष्टिम्) = द्युलोक से वर्षा को, मस्तिष्क रूप द्युलोक से होनेवाली आनन्द की वर्षा को (पवस्व) = प्राप्त कर । (सहस्रसा:) = हजारों शक्तियों को प्राप्त करानेवाला तू (देववीतौ) = दिव्यगुणों की प्राप्ति के निमित्त (वाजयुः) = शक्ति को हमारे साथ जोड़नेवाला है। (सिन्धुभिः) = ज्ञान प्रवाहों के द्वारा कलशे इस शरीर कलश में (वावशानः) = हमारे हित की कामना करता हुआ (सम्) [गच्छस्व] = संगत हो । (उस्त्रियाभिः) = ज्ञान किरणों के साथ (नः आयु:) = हमारे आयुष्य को (प्रतिरन्) = दीर्घ करता हुआ (सम्) = संगत हो ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण के द्वारा हमें 'शक्ति, दिव्यगुणों, ज्ञान व दीर्घजीवन' की प्राप्ति होती है ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (शतधारः) भवाननन्तशक्तियुक्तः (दिवः, वृष्टिं) द्युलोकाद्वृष्ट्या (सं, पवस्व) सम्यक् तर्पयतु (देववीतौ) यज्ञेषु (वाजयुः) विविधबलानां धारकोऽस्ति (सिन्धुभिः) प्रेमभावैः (कलशे) ममान्तःकरणे (सं वावसानः) सम्यग् वासं कुर्वन् (उस्रियाभिः) ज्ञानरूपशक्तिभिः (नः) मम (आयुः) वयः (प्रतिरन्) द्राघयतु ॥१४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O lord of thousandfold speed, power and victory, harbinger of a hundred showers of bliss, bring us showers of heavenly light for our yajnic worship of divinity. Loving and abiding in the holy hearts of celebrants, let streams of good health and joyous age flow to us with infinite oceans of love and bliss and showers of the light of knowledge.