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अ॒लाय्य॑स्य पर॒शुर्न॑नाश॒ तमा प॑वस्व देव सोम । आ॒खुं चि॑दे॒व दे॑व सोम ॥

English Transliteration

alāyyasya paraśur nanāśa tam ā pavasva deva soma | ākhuṁ cid eva deva soma ||

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Pad Path

अ॒लाय्य॑स्य । प॒र॒शुः । न॒ना॒श॒ । तम् । आ । प॒व॒स्व॒ । दे॒व॒ । सो॒म॒ । आ॒खुम् । चि॒त् । ए॒व । दे॒व॒ । सो॒म॒ ॥ ९.६७.३०

Rigveda » Mandal:9» Sukta:67» Mantra:30 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:18» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:30


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे परमात्मन् ! (देव) दिव्यगुणसंपन्न ! (अलाय्यस्य) सर्वत्र व्याप्त शत्रु का जो (परशुः) अस्त्र है, (तं) उस (आखुञ्चित्) सर्वघातक अस्त्र को (ननाश) नाश करिए ! (देव) हे परमात्मन् ! (आपवस्व) आप मुझको पवित्र करें ॥३०॥
Connotation: - परमात्मा जिनमें दैवी संपत्ति के गुण समझता है, उनको वृद्धियुक्त करता है और जिनमें आसुरी भाव के अवगुण देखता है, उनका नाश करता है ॥३०॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'आखु' को प्रभु प्राप्ति

Word-Meaning: - [१] गत मन्त्र के अनुसार प्रभु की उपासना करने पर (अलाय्यस्य) = [ an assailing enemy] आक्रमण करनेवाले शत्रु का (परशुः) = कुठार (ननाश) = नष्ट हो जाये। जब हम प्रभु की उपासना करते हैं, तो आक्रमण करनेवाले काम-क्रोध आदि शत्रुओं की टक्कर हृदयस्थ प्रभु से ही होती है। प्रभु से टकराकर ये नष्ट हो जाते हैं। इनके अस्त्र प्रभु पर टकराकर नष्ट-भ्रष्ट हो जाते हैं। इस प्रकार हे (देव) = प्रकाशमय (सोम) = शान्त प्रभो! (तम्) = उस अपने उपासक को आपवस्व = सर्वथा पवित्र जीवनवाला बनाइये। [२] हे (देव सोम) = प्रकाशमय शान्त प्रभो! आप (आखुं चित् एव) = इस [आ खनति] विषय वासनाओं को उखाड़ देनेवाले इस व्यक्ति को (ही) = निश्चय से प्राप्त होते हैं। विषय वासनाओं से शून्य हृदय वह आसन होता है, जो प्रभु के आसीन होने के लिये उपयुक्ततम है ।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभु की उपासना करते हैं, तो हमारे शत्रुओं के अस्त्र कुण्ठित हो जाते हैं । हम 'आखु' बन पाते हैं ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे परमात्मन् ! (देव) हे दिव्यगुणयुक्त ! (अलाय्यस्य) सर्वत्र व्याप्तशत्रोर्यत् (परशुः) अस्त्रं (तम्) तत् (आखुञ्चित्) सर्वघातकमस्त्रं (ननाश) नाशय। (देव) हे परमात्मन् ! (आपवस्व) मां पवित्रय ॥३०॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Soma, brilliant lord of life and vitality, destroy the axe of the assailant. Destroy the weapon of the thief. Save that which only turns the soil for food. O power divine, flow, purify us, save us.