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उ॒भाभ्यां॑ देव सवितः प॒वित्रे॑ण स॒वेन॑ च । मां पु॑नीहि वि॒श्वत॑: ॥

English Transliteration

ubhābhyāṁ deva savitaḥ pavitreṇa savena ca | mām punīhi viśvataḥ ||

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Pad Path

उ॒भाभ्या॑म् । दे॒व॒ । स॒वि॒तः॒ । प॒वित्रे॑ण । स॒वेन॑ । च॒ । माम् । पु॒नी॒हि॒ । वि॒श्वतः॑ ॥ ९.६७.२५

Rigveda » Mandal:9» Sukta:67» Mantra:25 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:17» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:25


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (देव) दिव्यगुणसंपन्न परमात्मन् ! (सवितः) हे सर्वोत्पादक ! आप (उभाभ्यां) ज्ञानयोग तथा कर्मयोग द्वारा (मां) मुझको (विश्वतः) सब ओर से (पुनीहि) पवित्र करिए (च) और (पवित्रेण) पवित्र (सवेन) ब्रह्मभाव से मुझे पवित्र करिए ॥२५॥
Connotation: - जो लोग अपने में ज्ञानयोग और कर्मयोग की न्यूनता समझते हैं, वे परमात्मा से ज्ञानयोग तथा कर्मयोग की प्रार्थना करें ॥२५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ज्ञान-यज्ञ

Word-Meaning: - [१] हे (देव) = प्रकाशमय (सवितः) = प्रेरक प्रभो! आप (पवित्रेण) = जीवन को पवित्र करनेवाले इस ज्ञान से (च) = तथा (सवेन) = वेदोपदिष्ट यज्ञों से (उभाभ्याम्) = ज्ञान व यज्ञ दोनों से (माम्) = मुझे (विश्वतः) = सब दृष्टियों से (पुनीहि) = पवित्र करिये। [२] अकेला ज्ञान व अकेले यज्ञ हमारे जीवनों को पवित्र नहीं कर पाते। यज्ञ रहित ज्ञान व्यर्थ सा होता है, यह पवित्रता के स्थान में अहंकार का कारण बन जाता है। तथा ज्ञान रहित यज्ञ अत्यन्त अपवित्र व विकृत हो जाते हैं, वे यज्ञ ही नहीं रहते । 'यज्ञ' ज्ञान को सार्थक करते हैं, ज्ञान यज्ञों को पवित्र करता है। ये दोनों मिलकर हमारे जीवनों को सर्वथा पवित्र करते हैं।
Connotation: - भावार्थ - ज्ञान व यज्ञों के समन्वय से हमारा जीवन सर्वतः पवित्र हो ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (देव) प्रशंसनीयगुण परमात्मन् ! (सवितः) हे सर्वजनक ! त्वं (उभाभ्याम्) ज्ञानयोगकर्मयोगाभ्यां (माम्) मां (विश्वतः) परितः (पुनीहि) पवित्रय। (च) अथ च (पवित्रेण) शुद्धेन (सवेन) ब्रह्मभावेन मां पवित्रय ॥२५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Agni, Savita, self-refulgent lord of light and creative energy, by both your purifying radiations and the creative living vitality your radiations bear, purify, sanctify, energise and vitalise me all round, all ways.