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सो अ॒र्षेन्द्रा॑य पी॒तये॑ ति॒रो रोमा॑ण्य॒व्यया॑ । सीद॒न्योना॒ वने॒ष्वा ॥
English Transliteration
Mantra Audio
so arṣendrāya pītaye tiro romāṇy avyayā | sīdan yonā vaneṣv ā ||
Pad Path
सः । अ॒र्ष॒ । इन्द्रा॑य । पी॒तये॑ । ति॒रः । रोमा॑णि । अ॒व्यया॑ । सीद॑न् । योना॑ । वने॑षु । आ ॥ ९.६२.८
Rigveda » Mandal:9» Sukta:62» Mantra:8
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:25» Mantra:3
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:8
ARYAMUNI
Word-Meaning: - हे स्वामिन् ! (सः) पूर्वोक्त आप (योना आसीदन्) अपने पद पर स्थित होते हुए (वनेषु) अपने राष्ट्र में (इन्द्राय पीतये) विज्ञानी की तृप्ति के लिये (अर्ष) व्याप्तिशील होवें (तिरः रोमाणि अव्यया) और अन्तर्हित जीवों को भी रोम-रोम प्रति अव्यय अर्थात् दृढ़ रक्षित करिये ॥८॥
Connotation: - इस मन्त्र में यह प्रतिपादन किया गया है कि राजधर्म की रक्षा द्वारा देश में ज्ञान और विज्ञानी की वृद्धि होती है ॥८॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
अव्यया रोमाणि
Word-Meaning: - [१] 'रोमं' शब्द [water] पानी के लिये प्रयुक्त होता है। ये जल शरीर में रेतः कणों के रूप में रहते हैं ‘आपः रेत्यो भूत्वा' । ये कण 'अव्यया' शरीर को न नष्ट होने देनेवाले हैं। हे सोम ! तेरे ये (अव्यया रोमाणि) = शरीर को न नष्ट होने देनेवाले रेतःकण (तिरः) = शरीर में तिरोहित होकर, रुधिर में व्याप्त होकर रहते हैं । (सः) = वह तू (इन्द्राय) = इस जितेन्द्रिय पुरुष के लिये (पीतये) = रक्षा के लिये (अर्ष) = प्राप्त हो। [२] तू (वनेषु) = [वन् संभक्तौ] उपासकों में (योनौ) = उस सारे ब्रह्माण्ड के प्रभव [उत्पत्ति - स्थान] प्रभु में (आसीदन्) = स्थित होता है। अर्थात् इस सोमरक्षण के द्वारा ही उपासक प्रभु को प्राप्त होनेवाले होते हैं।
Connotation: - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम रोगों से बचाकर शरीर का रक्षण करता है और उपासना की वृत्ति को पैदा करके प्रभु प्राप्ति का साधन बनता है ।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - हे प्रभो ! (सः) पूर्वोक्तस्त्वं (योना आसीदन्) स्वपदे तिष्ठन् (वनेषु) स्वराष्ट्रे (इन्द्राय पीतये) विज्ञानिनां तृप्तये (अर्ष) व्यापको भव (तिरः रोमाणि अव्यया) अथ चान्तर्हितजीवात्मानां समस्तरोमाणि रक्षय ॥८॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - O Soma, spirit of holy action and life’s sanctity, settle in your seat of yajnic action in the nation’s heart for the honour and excellence of human values and flow free down the permanent annals of human history and tradition.
