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अ॒स्य प्र॒त्नामनु॒ द्युतं॑ शु॒क्रं दु॑दुह्रे॒ अह्र॑यः । पय॑: सहस्र॒सामृषि॑म् ॥

English Transliteration

asya pratnām anu dyutaṁ śukraṁ duduhre ahrayaḥ | payaḥ sahasrasām ṛṣim ||

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Pad Path

अ॒स्य । प्र॒त्नाम् । अनु॑ । द्युत॑म् । शु॒क्रम् । दु॒दु॒ह्रे॒ । अह्र॑यः । पयः॑ । स॒ह॒स्र॒ऽसाम् । ऋषि॑म् ॥ ९.५४.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:54» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:11» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:1


ARYAMUNI

अब केवल परमात्मा के सेवन में हेतु कहते हैं।

Word-Meaning: - (अह्रयः) विज्ञानी लोग (अस्य) इस परमात्मा के (प्रत्नाम् ऋषिम् अनु) रचित प्राचीन वेद से (द्युतं) दीप्तिमान् (शुक्रं) पवित्र (सहस्रसाम्) अपरिमित शक्तियों को उत्पन्न करनेवाले (पयः दुदुह्रे) ब्रह्मानन्द रस को दुहते हैं ॥१॥
Connotation: - उक्त कामधेनुरूप परमात्मा से विद्वान् सदाचारी लोग दुग्धामृत के दोग्धा बनकर संसार में ब्रह्मामृत का संचार करते हैं ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

दोहन [वेदवाणी रूप गौ का दोहन]

Word-Meaning: - [१] जब सोम शरीर में सुरक्षित होता है, तो यह ज्ञानाग्नि का ईंधन बनकर ज्ञानाग्नि को दीप्त करता है । (अस्य) इस सोम की (प्रत्नाम्) = सदा से चली आ रही, सनातन (द्युतम्) = ज्योति के (अनु) = अनुसार, अर्थात् जितना जितना ये सोम का रक्षण करते हैं, उतना उतना (अह्वयः) = [अहि-wise learned] बुद्धिमान् मनुष्य (सहस्त्रसां ऋषिम्) = अनन्त ज्ञान से सने हुए इस वेद से [ऋषिः वेदः] (शुक्रं पयः) = शुद्ध ज्ञानदुग्ध को दुदुहे दोहते हैं। वेदवाणी गौ है । उसका दीप्त ज्ञान ही दुग्ध है। [२] बुद्धिमान् पुरुष सोम का अपने अन्दर रक्षण करते हैं, जिससे 'तीव्र बुद्धि' बनकर इस ज्ञान का दोहन कर सकें।
Connotation: - भावार्थ- सोम के अन्दर यह सनातन शक्ति है कि वह बुद्धि को तीव्र बनाता है। समझदार पुरुष इस सोम के रक्षण से तीव्र बुद्धि बनकर वेदज्ञान को प्राप्त करता है।

ARYAMUNI

अथ सर्वथा परमात्मसेवनहेतुर्वर्ण्यते।

Word-Meaning: - (अह्रयः) विज्ञानिनः पुरुषाः (अस्य) अमुष्य परमात्मनः (प्रत्नाम् ऋषिम् अनु) विरचितप्रत्नवेदेन (द्युतं शुक्रं सहस्रसाम्) दीप्तिमत् पूतममितशक्त्युत्पादकं (पयः दुदुह्रे) ब्रह्मानन्दरूपं रसं दुहन्ति ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Men of vision and science of yajna, in pursuit of the ancient and eternal Vedic tradition of this lord of light, peace and purity, distil the brilliant, pure and powerful and visionary knowledge of a thousandfold nourishing and inspiring gifts of existence.