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प्र क॒विर्दे॒ववी॑त॒येऽव्यो॒ वारे॑भिरर्षति । सा॒ह्वान्विश्वा॑ अ॒भि स्पृध॑: ॥

English Transliteration

pra kavir devavītaye vyo vārebhir arṣati | sāhvān viśvā abhi spṛdhaḥ ||

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Pad Path

प्र । क॒विः । दे॒वऽवी॑तये । अव्यः॑ । वारे॑भिः । अ॒र्ष॒ति॒ । स॒ह्वान् । विश्वाः॑ । अ॒भि । स्पृधः॑ ॥ ९.२०.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:20» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:10» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:1


ARYAMUNI

इस सूक्त में वेदवेत्ताओं में बलप्रदान का कथन करते हैं।

Word-Meaning: - वह परमात्मा (कविः) मेधावी है और (अव्याः) सबका रक्षक है (देववीतये) विद्वानों की तृप्ति के लिये (अर्षति) ज्ञान को देता है (साह्वान्) सहनशील है (विश्वाः स्पृधः) सम्पूर्ण दुष्टों को संग्रामों में (अभि) तिरस्कृत करता है ॥१॥
Connotation: - परमात्मा विद्वानों को ज्ञानप्रदान से और न्यायकारी सैनिकों को बलप्रदान से तृप्त करता है ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अव्यः कविः

Word-Meaning: - [१] यह सोम ('कविः') = कवि है, क्रान्तप्रज्ञ है, हमारी बुद्धि को सूक्ष्म बनानेवाला है। यह (देववीतये) = दिव्य गुणों की प्राप्ति के लिये होता है । सोम हमारी बुद्धि को सूक्ष्म बनाकर, हमारे ज्ञान को बढ़ाता है तथा ज्ञानवृद्धि के द्वारा दिव्य गुणों का वर्धन करता है। [२] (अव्यः) = रक्षकों में उत्तम यह सोम वारेभिः = सब रोगों के निवारण के साथ (प्र अर्षति) = प्रकर्षेण प्राप्त होता है। यह (विश्वा:) = सब (स्पृधः) = शत्रुओं को (अभि साह्वान्) = अभिभूत करनेवाला व कुचलनेवाला होता हैं ।
Connotation: - भावार्थ - रक्षित हुआ हुआ सोम हमें क्रान्तप्रज्ञ बनाता है, सो 'कवि' है। यह रोगों से हमें बचाता है तो 'अव्य' है ।

ARYAMUNI

अस्मिन् सूक्ते वेदवित्सु बलप्रदानं कथ्यते।

Word-Meaning: - स परमात्मा (कविः) मेधाव्यस्ति (अव्याः) सर्वस्य रक्षकश्चास्ति (देववीतये) विदुषां तृप्तये (अर्षति) ज्ञानं ददाति (साह्वान्) सहिष्णुरस्ति (विश्वाः) स्पृधः। कृत्स्नान् दुष्टान् सङ्ग्रामे (अभि) तिरस्करोति ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Soma, creative poet and universal visionary, all protective, withstanding all rivalry and opposition, moves on with protection, advancement and choice gifts for the creative souls for their divine fulfilment.