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प्र नि॒म्नेने॑व॒ सिन्ध॑वो॒ घ्नन्तो॑ वृ॒त्राणि॒ भूर्ण॑यः । सोमा॑ असृग्रमा॒शव॑: ॥

English Transliteration

pra nimneneva sindhavo ghnanto vṛtrāṇi bhūrṇayaḥ | somā asṛgram āśavaḥ ||

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Pad Path

प्र । नि॒मेन॑ऽइव । सिन्ध॑वः । घ्नन्तः॑ । वृ॒त्राणि॑ । भूर्ण॑यः । सोमाः॑ । अ॒सृ॒ग्र॒म् । आ॒शवः॑ ॥ ९.१७.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:17» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:7» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:1


ARYAMUNI

अब उपासक के हृदय में परमात्मा का प्रकाश कथन करते हैं।

Word-Meaning: - (सोमाः) उक्त सौम्यस्वभाववाला परमात्मा (वृत्राणि घ्नन्तः) अज्ञानों का नाश करता हुआ “वृणोत्याच्छादयत्यात्मानमिति वृत्रमज्ञानम्” (भूर्णयः) शीघ्र गतिशील (आशवः) सर्वव्यापक “अश्नुते व्याप्नोति सर्वमित्याशुः” (सिन्धवः प्रनिम्नेन इव) नदियें जैसे शीघ्र गतिशील नीचे की ओर जाती हैं, उसी प्रकार वह (असृग्रम्) भक्तों के हृदय में प्रकाशित होता है ॥१॥
Connotation: - जो लोग शुद्ध हृदय से उसकी उपासना करते हैं और यम-नियमों द्वारा अपने आत्मा को संस्कृत करते हैं, उनके हृदय में अतिशीघ्र परमात्मा का प्रकाश उत्पन्न होता है ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

भूर्णयः सोमाः

Word-Meaning: - [१] (इव) = जैसे (निम्नेन) = निम्न मार्ग से (सिन्धवः) = नदियाँ बहती हैं और तीव्र गति से बहती हैं, इसी प्रकार (आशवः) = तीव्र गतिवाले (सोमाः) = सोमकण (असृग्रम्) = [सृज्यन्ते] शरीर में सृष्ट होते हैं । इनकी उत्पत्ति से शरीर में स्फूर्ति आ जाती है, सारा शरीर शीघ्र गति सम्पन्न, क्रियाशील बन जाता है। [२] निम्न मार्ग से जाती हुईं नदियाँ किनारों व बाधाओं को तोड़ती चलती हैं, इसी प्रकार ये सोम (वृत्राणि घ्नन्तः) = ज्ञान की आवरणभूत वासनाओं को विनष्ट करनेवाले होते हैं और (भूर्णयः) = हमारा पालन करते हैं [भृ भरणे] । हमारा पालन करते हुए क्षिप्रगतिवाले होते हैं [क्षिप्रगमना: नि० ] ।
Connotation: - भावार्थ- सोम शरीर में शीघ्र गतिवाले होते हुए वासनाओं का विनाश करते हैं।

ARYAMUNI

अधुना उपासकस्य हृदये परमात्मप्रकाशः कथ्यते।

Word-Meaning: - (सोमाः) पूर्वोक्तः सौम्यस्वभाववान् परमात्मा (वृत्राणि घ्नन्तः) अज्ञानानि नाशयन् (भूर्णयः) द्रुततरगमनशीलः (आशवः) सर्वव्यापकः (सिन्धवः प्रनिम्नेन इव) यथा नद्यः निम्नाभिमुखं गच्छन्ति तथैव सः (असृग्रम्) भक्तहृदयेषु प्रकाशते ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Just as rivers flow down the slopes of mountains, so do streams of soma, divine bliss, destroying evil and darkness, universal, rapid and restless, flow for dedicated humanity.