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ए॒ष वसू॑नि पिब्द॒ना परु॑षा ययि॒वाँ अति॑ । अव॒ शादे॑षु गच्छति ॥
English Transliteration
Mantra Audio
eṣa vasūni pibdanā paruṣā yayivām̐ ati | ava śādeṣu gacchati ||
Pad Path
ए॒षः । वसू॑नि । पि॒ब्द॒ना । परु॑षा । य॒यि॒ऽवान् । अति॑ । अव॑ । शादे॑षु । ग॒च्छ॒ति॒ ॥ ९.१५.६
Rigveda » Mandal:9» Sukta:15» Mantra:6
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:5» Mantra:6
| Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:6
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (एषः) यह पूर्वोक्त परमात्मा (वसूनि) ऐश्वर्यों को (पिब्दना) छीननेवाले (परुषा) कठोर राक्षसों को (अति ययिवान्) अतिक्रमण करके (शादेषु) युद्धों में भक्तों की (अवगच्छति) अनेक प्रकार से ज्ञानादिकों को देकर रक्षा करता है ॥६॥
Connotation: - जो पुरुष अपने पवित्र भावों से परमात्मपरायण होते हैं, परमात्मा उनकी अवश्यमेव रक्षा करता है ॥६॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
वसु प्राप्ति
Word-Meaning: - [१] (एषः) = यह सोम (परुषा) = अति कठोर [प्रबल] (पिब्दना) = पीड़ित करनेवाले राक्षसी भावों को (अति ययिवान्) = लाँघकर गति करता हुआ, (शादेशु) = [शद् शातने] शत्रुओं का शातन होने पर (वसूनि) = सब वसुओं को निवास के लिये आवश्यक पदार्थों को (अवगच्छति) = अन्दर प्राप्त कराता है [जानता है] । [२] सोमरक्षण से क्रूर आसुरी भाव विनष्ट होते हैं। उत्तम दिव्य भावों का विकास होता है । ये भाव ही जीवन को सुन्दर बनानेवाले वसु हैं। इनकी प्राप्ति होती तभी है जब कि हम काम-क्रोध आदि शत्रुओं को विनष्ट कर पाते हैं ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण अशुभ भावों को विनष्ट करता है । सब वसुओं को प्राप्त कराता है।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (एषः) असौ परमात्मा (वसूनि) ऐश्वर्याणि (पिब्दना) अपहरतः (परुषा) दारुणान् राक्षसान् (अति ययिवान्) अतिक्रम्य (शादेषु) युद्धेषु भक्तान् (अवगच्छति) बहुविधज्ञानादीनि साधनानि प्रदाय रक्षति ॥६॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - It moves and overcomes hard and rough places of hidden hoarded wealth of negative powers and goes over to protect the powers that observe divine discipline in the battles of life.
