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ए॒ष शृङ्गा॑णि॒ दोधु॑व॒च्छिशी॑ते यू॒थ्यो॒३॒॑ वृषा॑ । नृ॒म्णा दधा॑न॒ ओज॑सा ॥

English Transliteration

eṣa śṛṅgāṇi dodhuvac chiśīte yūthyo vṛṣā | nṛmṇā dadhāna ojasā ||

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Pad Path

ए॒षः । शृङ्गा॑णि । दोधु॑वत् । शिशी॑ते । यू॒थ्यः॑ । वृषा॑ । नृ॒म्णा । दधा॑नः । ओज॑सा ॥ ९.१५.४

Rigveda » Mandal:9» Sukta:15» Mantra:4 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:5» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:4


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (एषः) उक्त परमात्मा (शृङ्गाणि) सब ब्रह्माण्डों को (दोधुवत्) गतिशील करता है (शिशीते) सर्वव्यापक है (यूथ्यः) सबका पति है (वृषा) कामनाओं की वृष्टि करनेवाला है (ओजसा) अपने पराक्रम से (नृम्णा) सब ऐश्वर्यों को (दधानः) धारण कर रहा है ॥४॥
Connotation: - वही परमात्मा कोटानुकोटि ब्रह्माण्डों का चलानेवाला है और उसी ने इन ब्रह्माण्डों में विद्युत् आदि शक्तियों को उत्पन्न करके अनेक प्रकार के आकर्षण विकर्षण आदि गुणों को उत्पन्न किया है। एकमात्र उसकी उपासना करने से मनुष्य सद्गति को लाभ कर सकता है ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ऐश्वर्य-शक्ति व उत्साह

Word-Meaning: - [१] जैसे (यूथ्यः) = यूथ का, गोसमूह का रक्षण करनेवाला (वृषा) = बैल (शृंगाणि) = अपने सींगों को (दोधुवत्) = कम्पित करता हुआ (शिशीते) = तीव्र करता है उसी प्रकार यह सोम (यूथ्यः) = कर्मेन्द्रिय ज्ञानेन्द्रिय व प्राण आदि के यूथों को रक्षित करनेवाला है, (वृषा) = उनमें शक्ति का सेचन करनेवाला है । यह अपने श्रृंगाणि रोगकृमि विनाशक शक्तियों को (दोधुवत्) = गतिमय करता है और उन शत्रुनाशक शक्तियों को (शिशीते) = तीव्र करता है । [२] यह (ओजसा) = अपनी ओजस्विता के द्वारा (नृम्णा) = हमारे लिये आवश्यक धनों को [wealth] व शक्ति [strength] व उत्साह [courage] को (दधानः) = धारण करता है।
Connotation: - भावार्थ- सोम के अन्दर रोग व वासना रूप शत्रुओं के नाश का गुण है। यह ओजस्विता के द्वारा ऐश्वर्य-शक्ति व उत्साह को प्राप्त कराता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (एषः) उक्त ईश्वरः (शृङ्गाणि) अखिललोकान् (दोधुवत्) चालयति (शिशीते) सर्वत्रगोऽस्ति (यूथ्यः) सर्वपतिः (वृषा) कामनाप्रदः (ओजसा) स्वतेजसा (नृम्णा) कृत्स्नमैश्वर्यं (दधानः) धारयन् तिष्ठति ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - This Soul, vibrating on top of the highest bounds of the universe, abides in repose in the world of existence, one with all in the multitudinous world, generous and virile, bearing and ruling the entire wealth and powers of the universe by its power and splendour.