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सोम॑: पुना॒न ऊ॒र्मिणाव्यो॒ वारं॒ वि धा॑वति । अग्रे॑ वा॒चः पव॑मान॒: कनि॑क्रदत् ॥
English Transliteration
Mantra Audio
somaḥ punāna ūrmiṇāvyo vāraṁ vi dhāvati | agre vācaḥ pavamānaḥ kanikradat ||
Pad Path
सोमः॑ । पु॒ना॒नः । ऊ॒र्मिणा॑ । अव्यः॑ । वार॑म् । वि । धा॒व॒ति॒ । अग्रे॑ । वा॒चः । पव॑मानः । कनि॑क्रदत् ॥ ९.१०६.१०
Rigveda » Mandal:9» Sukta:106» Mantra:10
| Ashtak:7» Adhyay:5» Varga:10» Mantra:5
| Mandal:9» Anuvak:7» Mantra:10
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (सोमः) सर्वोत्पादक परमात्मा (पुनानः) पवित्र करते हुए (ऊर्मिणा) अपने आनन्द की लहरों से (अव्यः) सबकी रक्षा करता हुआ (वारं) सद्गुणसम्पन्न पुरुष को (विधावति) प्राप्त होते हैं। जो परमात्मा (अग्रे, वाचः) सर्वोपरि आध्यात्मिक विद्यारूप वाणी को (कनिक्रदत्) गर्जाता हुआ (पवमानः) पवित्र बनाता है ॥१०॥
Connotation: - जो पुरुष सद्गुणसम्पन्न हैं, उनको परमात्मा अपने आनन्द में निमग्न करता है अर्थात् ब्रह्माम्बुधि में वे लोग अपने आपको सदैव शान्तिमय वारि से स्नान कराते हैं ॥१०॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
वाचः अग्रे
Word-Meaning: - (सोम:) = सोम [वीर्यशक्ति] (पुनानः) = पवित्र किया जाता हुआ (ऊर्मिणा) = प्रकाश के साथ (अव्यः) [अवेः] = रक्षक पुरुष के (वारम्) = जिसमें से वासनाओं का निवारण किया गया है, उस हृदय की ओर (विधावति) = विशिष्ट रूप से गतिवाला होता है। यह सोम पवित्र हृदय पुरुष को प्राप्त होता है। उसके जीवन को यह प्रकाशमय बना देता है। (कनिक्रदत्) = खूब ही उस प्रभु का आह्वान करता हुआ यह सोम (पवमानः) = हमें पवित्र बनाता हुआ (वाच:) = इस वेदवाणी से इस के द्वारा कर्तव्य मार्ग को जानता हुआ (अग्रे) = आगे और आगे बढ़ता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोम जीवन को प्रकाशमय करता है, पवित्र करता है, प्रभु स्तवन की वृत्ति वाला बनाता है । वेदानुकूल मार्ग पर हमें आगे बढ़ाता है ।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (सोमः) सर्वोत्पादकः सः (पुनानः) पवित्रयन् (ऊर्म्मिणा) स्वकीयानन्दप्रवाहैः (अव्यः) सर्वान्रक्षन् (वारम्) सद्गुणसम्पन्नजनं (विधावति) प्राप्नोति यश्च परमात्मा (अग्रे, वाचः) सर्वोत्कृष्टाध्यात्मिकविद्यात्मकवाणीं (कनिक्रदत्) गर्जयन् (पवमानः) पावयति ॥१०॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Soma, pure and purifying, protective and blissful, flowing by streams and sanctifying, roaring with ancient and original hymns of divine adoration, rushes to the heart core of the distinguished soul.
