Go To Mantra
Viewed 365 times

त्वामिद्य॑व॒युर्मम॒ कामो॑ ग॒व्युर्हि॑रण्य॒युः । त्वाम॑श्व॒युरेष॑ते ॥

English Transliteration

tvām id yavayur mama kāmo gavyur hiraṇyayuḥ | tvām aśvayur eṣate ||

Mantra Audio
Pad Path

त्वाम् । इत् । य॒व॒ऽयुः । मम॑ । कामः॑ । ग॒व्युः । हि॒र॒ण्य॒युः । त्वाम् । अ॒श्व॒ऽयुः । आ । ई॒ष॒ते॒ ॥ ८.७८.९

Rigveda » Mandal:8» Sukta:78» Mantra:9 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:32» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:9


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (अदब्धः) अहिंसित अविनश्वर सदा एकरस (सः) वह परमात्मा (मर्त्यानाम्+मन्युम्) मनुष्यों के क्रोध और अपराध को (नि+चिकीषते) दबा देता है और (निदः+पुरा) निन्दा के पूर्व ही (चिकीषते) निन्दक को जान लेता है अर्थात् जो कोई उसकी निन्दा करना चाहता है, उसके पूर्व ही उसको वह दण्ड दे देता है ॥६॥
Connotation: - जिस हेतु ईश्वर सर्वज्ञ और सर्वान्तर्य्यामी है, अतः सबके हृदय की बात जान शुभाशुभ फल देता है। इस हेतु हृदय में भी किसी का अनिष्टचिन्तन न करे ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

यवयुः, गव्युः, हिरण्ययुः, अश्वयुः [कामः]

Word-Meaning: - [१] हे प्रभो ! (मम) = मेरा (यवयुः कामः) = [ यवः यु मिश्रणामिश्रणयोः] बुराई को दुर करने व अच्छाई को प्राप्त करने का काम [मनोरथ] (त्वां इत्) = आपको ही (एषते) = प्राप्त होता है, अर्थात् मैं 'यव' की कामनावाला होता हुआ आपको ही प्राप्त होता हूँ। इसी प्रकार (गव्युः) = ज्ञानेन्द्रियों की प्राप्ति का काम [मनोरथ] आपको ही प्राप्त होता है। [२] इसी प्रकार (हिरण्ययुः) = हितरमणीय ज्ञान की अभिलाषा आपकी ओर ही मुझे लाती है तथा (अश्वयुः) = उत्तम कर्मेन्द्रियों की कामना (त्वाम्) = आपको ही प्राप्त करती है।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु ही हमें बुराइयों से दूर करके अच्छाइयों को प्राप्त कराते हैं। प्रभु ही उत्तम ज्ञानेन्द्रियों, हितरमणीय ज्ञानों व उत्तम कर्मेन्द्रियों को प्राप्त कराते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - अदब्धः=अहिंसितः=अविनश्वरः। स इन्द्रः। मर्त्यानाम्=मनुष्याणाम्। मन्युं=क्रोधमपराधं च नि+चिकीषते=नितरां तिरस्करोति। निदः=निन्दायाः। पुरा=पूर्वमेव। चिकीषते। यः कश्चित् तं निन्दितुमिच्छति तं प्रागेव दण्डयति ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - My desire for food and fulfilment, for lands, cows, literature and culture, for gold and the beauties of life, and for horses, transport, advancement and achievement, all this concentrates in you, you alone.