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अध॑ प्रि॒यमि॑षि॒राय॑ ष॒ष्टिं स॒हस्रा॑सनम् । अश्वा॑ना॒मिन्न वृष्णा॑म् ॥

English Transliteration

adha priyam iṣirāya ṣaṣṭiṁ sahasrāsanam | aśvānām in na vṛṣṇām ||

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Pad Path

अध॑ । प्रि॒यम् । इ॒षि॒राय॑ । ष॒ष्टिम् । स॒हस्रा॑ । अ॒स॒न॒म् । अश्वा॑नाम् । इत् । न । वृष्णा॑म् ॥ ८.४६.२९

Rigveda » Mandal:8» Sukta:46» Mantra:29 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:6» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:29


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (यः) जो सर्वज्ञ ईश (अश्वेभिः) संसार के साथ ही (वहते) वहता है अर्थात् इस जगत् के साथ ही सब कार्य्य कर रहा है, जो (उस्राः) प्राणियों की इन्द्रियों में व्याप्त होकर विद्यमान है, जो इन्द्रिय (त्रिः सप्त) त्रिगुण सात हैं (सप्तीनाम्) ७० (सत्तर) के जो (एभिः) इन सोम प्रभृति ओषधियों के साथ और (सोमसुद्भिः) उन ओषधियों को काम में लानेवाले प्राणियों के साथ विद्यमान है। (सोमपाः) हे सोमरक्षक (शुक्रपूतपाः) हे शुचि और पवित्र जीवों के रक्षक देव ! (दानाय) महादान के लिये आप इस रचना को रचते हैं ॥२६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वेदवचन + शक्तिसिक्त इन्द्रियाँ

Word-Meaning: - [१] (अध) = सब (इषिराय) = उस प्रेरक प्रभु के लिए (प्रियं) = प्रिय (षष्टिं सहस्त्रा) = आध्यात्मिक- आधिभौतिक व आधिदैविक अर्थभेद से २० हज़ार होते हुए भी जो ६० हज़ार हैं उन वेदवचनों को असनम् = मैं प्राप्त करूँ। [२] (न) = इसी प्रकार (इत्) = निश्चय से (वृष्णाम् अश्वानाम्) = शक्ति का सेचन करनेवाले इन्द्रियाश्वों का ग्रहण करूँ।
Connotation: - भावार्थ- वेदवचनों का ग्रहण करते हुए हम प्रभु के प्रिय बनें। शक्तिसिक्त इन्द्रियों को प्राप्त करें।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - य ईशः। अश्वेभिः=अश्वैः संसारैः सह। वहते=सर्वाणि कार्य्याणि सम्पादयति। यश्च उस्रा=इन्द्रियाणि। वस्ते। व्याप्य तिष्ठति। तासां गवां सख्या=त्रिःसप्त सप्तीनाम्। पुनः। एभिः=सोमेभिः सोमप्रभृतिभिरोषधीभिः। पुनः। सोमसुद्भिः=सोमसम्पादकजीवैश्च सह स वहते। हे सोमपाः=हे सोमरक्षक ! हे शुक्रपूतपाः=शुक्राणां शुचीनाम्। पूतानां पवित्राणां रक्षक ! त्वम्। दानाय। इमम्। रचनां करोषि ॥२६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - And I have received sixty thousand gifts of value dear to the strong and ambitious, like horses of the most virile breed dear to the warriors.