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वसु॒र्वसु॑पति॒र्हि क॒मस्य॑ग्ने वि॒भाव॑सुः । स्याम॑ ते सुम॒तावपि॑ ॥

English Transliteration

vasur vasupatir hi kam asy agne vibhāvasuḥ | syāma te sumatāv api ||

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Pad Path

वसुः॑ । वसु॑ऽपतिः । हि । क॒म् । असि॑ । अ॒ग्ने॒ । वि॒भाऽव॑सुः । स्याम॑ । ते॒ । सु॒ऽम॒तौ । अपि॑ ॥ ८.४४.२४

Rigveda » Mandal:8» Sukta:44» Mantra:24 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:40» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:24


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (अग्निः) वह सर्वगति ईश (शुचिव्रततमः) अतिशय पवित्रकर्मा अतिशय पवित्र नियमों को स्थापित करनेवाला है, वह (शुचिः+विप्रः) अतिशय पवित्र विद्वान् है, वह (शुचिः+कविः) अतिशय शुद्ध कवि है, (शुचिः) वह महाशुचि है (आहुतः) पूजित होने पर उपासकों के हृदय को पवित्र करता हुआ (रोचते) प्रकाशित होता है ॥२१॥
Connotation: - ईश्वर परम पवित्र है, अतः उसकी उपासना भी पवित्र बनकर करो ॥२१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'वसु, वसुपति, विभावसु' वसु

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = अग्रणी प्रभो ! आप (वसुः) = सबको बसानेवाले हैं। (वसुपतिः) = सब धनों के स्वामी है। (हि) = निश्चय से (कं) = आनन्दमय (असि) = हैं। (विभावसुः) = दीप्ति रूप धनवाले हैं। [२] हम (ते) = आपकी (सुमतौ) = कल्याणी मति में अपि स्याम ही हों। हमारे पर प्रभु का सदा अनुग्रह बना रहे।
Connotation: - भावार्थ-प्रभु सबको बसानेवाले, सब धनों के स्वामी, दीप्ति रूप धनवाले हैं। उस आनन्दमय प्रभु की कल्याणी मति में हमारा निवास हो ।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - अग्निः=सर्वगतिरीशः। शुचिव्रततमः=अतिशयेन पवित्रव्रतोऽस्ति। शुचिः=शुद्धो विप्रो विद्वानस्ति। शुचिः कविरस्ति। पुनः। शुचिरस्ति। आहुतः सन्। हृदि रोचते=प्रकाशते ॥२१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, you are the shelter home of all, lord protector and ruler of the world’s wealth, blissful, refulgent lord of kindness and love. We pray let us be under the protection of your goodwill.