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यो अ॒ग्निं त॒न्वो॒३॒॑ दमे॑ दे॒वं मर्त॑: सप॒र्यति॑ । तस्मा॒ इद्दी॑दय॒द्वसु॑ ॥

English Transliteration

yo agniṁ tanvo dame devam martaḥ saparyati | tasmā id dīdayad vasu ||

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Pad Path

यः । अ॒ग्निम् । त॒न्वः॑ । दमे॑ । दे॒वम् । मर्तः॑ । स॒प॒र्यति॑ । तस्मै॑ । इत् । दी॒द॒य॒त् । वसु॑ ॥ ८.४४.१५

Rigveda » Mandal:8» Sukta:44» Mantra:15 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:38» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:15


SHIV SHANKAR SHARMA

परमात्मा कैसे प्रसन्न होता है, इस ऋचा से दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - (प्रत्नेन) पुरातन नित्य (मन्मना) मननीय स्तोत्र से अथवा मन से ध्यात वह (कविः+अग्निः) महाज्ञानी कवीश्वर सर्वाधार ईश्वर (स्वाम्+तन्वम्) स्वकीय उपासक की तनु को (शुम्भानः) प्रकाशित करता हुआ (विप्रेण) उस उपासक के साथ (वावृधे) रहता है ॥१२॥
Connotation: - इस का तात्पर्य्य यह है कि मन से और प्रेम से ध्यात, गीत, स्तुत होने पर वह प्रसन्न होता है और उस उपासक के साथ सदा निवास करता है ॥१२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

तस्मा इद् दीदयद् वसु

Word-Meaning: - (यः) = जो (मर्तः) = मनुष्य (देवं अग्निं) = उस प्रकाशमय अग्रणी प्रभु को (तन्वः दमे) = इस शरीर घर में, अर्थात् शरीररूप गृह में (सपर्यति) = पूजता है, (तस्मा) = उसके लिए (इत्) = निश्चय से वे (वसु) = निवास के लिए आवश्यक धनों को (दीदयत्) = देते हैं।
Connotation: - भावार्थ:- प्रभु उपासक के लिए आवश्यक धनों को प्राप्त कराते ही हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

परमात्मा कथं प्रसीदतीत्यनया दर्शयति।

Word-Meaning: - प्रत्नेन=पुराणेन=नित्येन। मन्मना=मननीयेन स्तोत्रेण मनसा वा ध्यातः। कविरग्निः। स्वां=तन्वं स्वीयामुपासकतनुम्। शुम्भानः=प्रकाशयन्। विप्रेण=मेधाविनोपासकेन वावृधे=वर्धते तिष्ठतीत्यर्थः ॥१२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Whoever the mortal that offers devotion to self- refulgent Agni within his yajnic home of the body, the lord would bless him with the wealth of spiritual illumination.