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अ॒ग्निं म॒न्द्रं पु॑रुप्रि॒यं शी॒रं पा॑व॒कशो॑चिषम् । हृ॒द्भिर्म॒न्द्रेभि॑रीमहे ॥

English Transliteration

agnim mandram purupriyaṁ śīram pāvakaśociṣam | hṛdbhir mandrebhir īmahe ||

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Pad Path

अ॒ग्निम् । म॒न्द्रम् । पु॒रु॒ऽप्रि॒यम् । शी॒रम् । पा॒व॒कऽशो॑चिषम् । हृ॒त्ऽभिः । म॒न्द्रेभिः॑ । ई॒म॒हे॒ ॥ ८.४३.३१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:43» Mantra:31 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:35» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:31


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (अग्ने) हे सर्वशक्ते सर्वगतिप्रद ! (सहस्कृत) हे समस्त जगत्कर्ता परमात्मन् ! (यत्) जो तू (दिविजाः) सर्वोपरि द्युलोक में भी (असि) विद्यमान है (वा) अथवा (अप्सुजाः) सर्वत्र आकाश में तू व्यापक है, (तम्+त्वाम्) उस तुझको (गीर्भिः) वचनों द्वारा (हवामहे) स्तुति करते हैं, तेरी महती कीर्ति को गाते हैं ॥२८॥
Connotation: - लोक समझते हैं कि भगवान् सूर्य्य अग्नि आदि तेजस पदार्थों में ही व्यापक है। इस ऋचा द्वारा दिखलाते हैं कि भगवान् सर्वत्र व्यापक है। जो सबमें व्याप्त है, उसी की कीर्ति हम गाते हैं। आप भी गावें ॥२८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'मन्द्र, पुरुप्रिय, शीर, पावकशोचिष्' अग्नि

Word-Meaning: - [१] सबसे ऊँचा तप 'मनः प्रसाद' है। सो करते हैं कि (मन्द्रेभिः) = सदा आनन्द में रहनेवाले (हृद्भिः) = हृदयों से हम (अग्निं) = अग्रणी प्रभु की (ईमहे) = [याचामहे] प्रार्थना करते हैं। [२] उस प्रभु का आराधन करते हैं जो (मन्द्रं) = सदा आनन्दमय हैं। (पुरुप्रियं) = पालक व पूरक व प्रीणित करनेवाले हैं। (शीरं) = सब बुराइयों का संहार करनेवाले हैं। (पावकशोचिषम्) = पवित्र दीप्तिवाले हैं। इनका आराधन करते हुए हम भी ऐसा ही बनते हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रसादयुक्त हृदय से उस आनन्दमय- बुराइयों को समाप्त करनेवाले - पवित्र दीप्ति वाले प्रभु का उपासन करते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे अग्ने ! हे सहस्कृत=सहसां जगतां कर्तः परमात्मन् ! यद् यत् त्वम्। दिविजाः=सर्वोपरि द्युलोकेऽजायसे। असि वा=अथवा। अप्सुजाः=सर्वत्राकाशेषु जायसे। आप इत्याकाशनाम=निघण्टौ। सर्वव्यापकोऽसीत्यर्थः। तं त्वा=त्वाम्। गीर्भिः। हवामहे=ह्वयामः स्तुमः ॥२८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - With songs of heartiest love and joy, with enthusiasm, we invoke and adore Agni, blissful giver of happiness, dear to all people, omnipresent in existence and pure refulgent sanctifier of life.