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ते घेद॑ग्ने स्वा॒ध्योऽहा॒ विश्वा॑ नृ॒चक्ष॑सः । तर॑न्तः स्याम दु॒र्गहा॑ ॥

English Transliteration

te ghed agne svādhyo hā viśvā nṛcakṣasaḥ | tarantaḥ syāma durgahā ||

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Pad Path

ते । घ॒ । इत् । अ॒ग्ने॒ । सु॒ऽआ॒ध्यः । अहा॑ । विश्वा॑ । नृ॒ऽचक्ष॑सः । तर॑न्तः । स्या॒म॒ । दुः॒ऽगहा॑ ॥ ८.४३.३०

Rigveda » Mandal:8» Sukta:43» Mantra:30 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:34» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:30


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (अङ्गिरस्तम) हे सबको अतिशय रसप्रद ! (अग्ने) हे सर्वाधार सर्वशक्ते ! (मनुष्वत्) बोद्धा विज्ञाता मनुष्यों के समान (यम्+त्वाम्) जिस तुझको (जनासः) मनुष्य (इन्धते) समाधि में देखते हैं, (सः) वह तू (मे+वचः) मेरी स्तुतिरूप वचन को (बोधि) जान अर्थात् कृपापूर्वक सुन ॥२७॥
Connotation: - हे भगवन् ! मैं आपकी केवल स्तुति ही करता हूँ, इसी के ऊपर कृपा कर। यद्यपि तुझको ध्यान में योगिगण देखते हैं, तथापि मैं उसमें असमर्थ होकर केवल तेरी कीर्ति गाता हूँ ॥२७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

नृचक्षसः - स्वाध्यः

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = परमात्मन् ! (घा इत्) = निश्चय से (ते) = आपका (स्वाध्यः) = उत्तम आध्यान करनेवाले, (विश्वा अहा) = सब दिनों अर्थात् (सदा नृचक्षसः) = सब मनुष्यों को देखनेवाले - उनका ध्यान करनेवाले उनके हित के लिए कर्मों को करनेवाले हम (दुर् गहा) = कठिनता से पार करने योग्य शत्रु को (तरन्तः स्याम) = तैर जानेवाले हों। [२] काम-क्रोध आदि प्रबल भयंकर शत्रुओं को जीतने का यही मार्ग है कि हम प्रभु का ध्यान करें और सर्वहितकर कर्मों में लगे रहें।
Connotation: - भावार्थ-दु-र्गह शत्रुओं को भी ध्यान करनेवाले तथा लोकहित के कर्मों में लगे रहनेवाले लोग तैर जाते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे अङ्गिरस्तम=सर्वेषामतिशयेन रसप्रद ! हे अग्ने ! मनुष्वत्=यथा मनवो मन्तारो जनाः तथा यं त्वा जनासः=जनाः। इन्धते समाधौ दीपयन्ति पश्यन्तीत्यर्थः स त्वम्। मे=मम वचः। बोधि=बुध्यस्व ॥२७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Doing good works in your service, always watching all the people around, may we become breakers of the most difficult oppositions and cross over the challenging seas of life.