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घ्नन्मृ॒ध्राण्यप॒ द्विषो॒ दह॒न्रक्षां॑सि वि॒श्वहा॑ । अग्ने॑ ति॒ग्मेन॑ दीदिहि ॥

English Transliteration

ghnan mṛdhrāṇy apa dviṣo dahan rakṣāṁsi viśvahā | agne tigmena dīdihi ||

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Pad Path

घ्नन् । मृ॒ध्राणि॑ । अप॑ । द्विषः॑ । दह॑न् । रक्षां॑सि । वि॒श्वहा॑ । अग्ने॑ । ति॒ग्मेन॑ । दी॒दि॒हि॒ ॥ ८.४३.२६

Rigveda » Mandal:8» Sukta:43» Mantra:26 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:34» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:26


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (अग्ने) हे सर्वगतिप्रददेव ! (शृण्वन्तम्) हमारी प्रार्थनाओं को सुनते हुए (जातवेदसम्) निखिल ज्ञानोत्पादक और (द्विषः) जगत् के द्वेष विघ्नों को (अप+घ्नन्तम्) विनष्ट करते हुए (तम्+त्वा) उस तुझको (वयम्) हम उपासक (हवामहे) पूजें, गावें, आवाहन करें ॥२३॥
Connotation: - जिस कारण वही देव हमारी प्रार्थनाएँ सुनता और निखिल विघ्नों को दूर करता, अतः वही एक मनुष्यों का परम पूज्य ध्येय और स्तुत्य है ॥२३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'मृध्र, द्विष्, राक्षस्' विनाश

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = परमात्मन्! आप (मृध्राणि) = हमारा हिंसन करनेवाले (दास्यव) = भावों को (घ्नन्) = नष्ट करते हुए (द्विषः) = द्वेष की भावनाओं को अप हमारे से दूर करते हुए तथा (विश्वहा) = सदा (रक्षांसि दहन्) = राक्षसी भावों को दग्ध करते हुए (तिग्मेन) = अपनी तीव्र ज्ञानज्योति से (दीदिहि) = हमारे में दीप्त होइए। [२] प्रभु की उपासना से सब हिंसक वासनाएँ विनष्ट हो जाती है-द्वेष दूर हो जाते हैं, राक्षसी भाव दग्ध हो जाते हैं। ऐसा होने पर प्रभु का प्रकाश हमारे में चमक उठता है।
Connotation: - भावार्थ:- हिंसक शत्रुओं द्वेषों व राक्षसीभावों से ऊपर उठने के लिए आवश्यक है कि हम प्रभु की उपासना करें।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे अग्ने ! शृण्वन्तम्=अस्माकं प्रार्थनां शृण्वन्तम्। पुनः। जातवेदसम्। निखिलज्ञानोत्पादकम्। पुनः। द्विषः=द्वेष्टॄन् विघ्नान् अपघ्नन्तम्=विनाशयन्तम्। तं त्वा वयं हवामहे ॥२३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Eliminating violent enemies and jealous adversaries, always burning off the evil, Agni, shine and energise this land with flames of fire and blazing light.