Go To Mantra
Viewed 465 times

उद॑ग्ने॒ तव॒ तद्घृ॒ताद॒र्ची रो॑चत॒ आहु॑तम् । निंसा॑नं जु॒ह्वो॒३॒॑ मुखे॑ ॥

English Transliteration

ud agne tava tad ghṛtād arcī rocata āhutam | niṁsānaṁ juhvo mukhe ||

Mantra Audio
Pad Path

उत् । अ॒ग्ने॒ । तव॑ । तत् । घृ॒तात् । अ॒र्चिः । रो॒च॒ते॒ । आऽहु॑तम् । निंसा॑नम् । जु॒ह्वः॑ । मुखे॑ ॥ ८.४३.१०

Rigveda » Mandal:8» Sukta:43» Mantra:10 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:30» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:10


SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः अग्नि के गुण दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - (अग्निः) अग्निदेव (ओषधीः) गोधूम आदि समस्त वनस्पतियों को (धासिम्) निज भक्ष बनाकर (बप्सत्) उनको खाते हुए भी (न+वायति) तृप्त नहीं होते। पुनः। किन्तु (तरुणीः) नवीन तरुण ओषधियों को (अपि) भी (यन्) प्राप्त कर उनमें फैलते हुए खाना चाहते हैं ॥७॥
Connotation: - यह भी स्वाभाविक वर्णन है। आग्नेय शक्तियाँ ही पदार्थमात्र को बढ़ाती और घटाती हैं। इस कारण सदा पदार्थों में अनपचय और अपचय होता ही रहता है, हे मनुष्यों ! यह पदार्थगति देख ईश्वर के चिन्तन में लगो। एक दिन तुम्हारा भी अपचय आरम्भ होगा ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अग्निहोत्र

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = यज्ञाग्ने ! (तव तद् अर्चिः) = तेरी वह ज्वाला (घृतात्) = घृत के द्वारा (आहुतम्) = समन्तात् आहुत हुई हुई (उद्रोचते) = ऊपर उठती हुई चमकती है। [२] यह ज्वाला (जुह्वा) = घृत के चम्मच के (मुखे) = अग्रभाग में (निंसानम्) = चुम्बन करती प्रतीत होती है। यज्ञाग्नि की ज्वाला इतनी ऊपर उठती है कि आहुति साधनभूत चम्मच को छूती प्रतीत होती है।
Connotation: - भावार्थ:-जिन घरों में अग्निहोत्र में अग्नि की ज्वालाएँ सब ऊपर उठती हैं, वहाँ इस अग्निहोत्र के द्वारा 'सौमनस्य' प्राप्त होकर शान्ति का निवास होता है।

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनरग्निगुणाः प्रदर्श्यन्ते।

Word-Meaning: - अग्निः। ओषधीः=सर्वान् गोधूमादिवनस्पतीन्। धासिम्=स्वभक्षं विधाय। ताश्च। बप्सद्=भक्षयन्नपि। न वायति=न तृप्यति। पुनः। तरुणीरपि ओषधीः यन् तत्र प्रसरन् भक्षयति ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, that flame of yours fed and served with ghrta rises and shines, having received its beauteous energy from the ladle in yajna.