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आ नो॑ अ॒द्य सम॑नसो॒ गन्ता॒ विश्वे॑ स॒जोष॑सः । ऋ॒चा गि॒रा मरु॑तो॒ देव्यदि॑ते॒ सद॑ने॒ पस्त्ये॑ महि ॥

English Transliteration

ā no adya samanaso gantā viśve sajoṣasaḥ | ṛcā girā maruto devy adite sadane pastye mahi ||

Pad Path

आ । नः॒ । अ॒द्य । सऽम॑नसः । गन्त॑ । विश्वे॑ । स॒ऽजोष॑सः । ऋ॒चा । गि॒रा । मरु॑तः । देवि॑ । अदि॑ते । सद॑ने । पस्त्ये॑ । म॒हि॒ ॥ ८.२७.५

Rigveda » Mandal:8» Sukta:27» Mantra:5 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:31» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:5


SHIV SHANKAR SHARMA

यज्ञ में सब ही पूजनीय हैं, यह दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - (विश्वे) हे सर्व विद्वानो ! (समनसः) आप सब एकमन होकर और (सजोषसः) समान कार्य्य के लिये सब कोई मिलकर (अद्य+नः) आज हमारे साथ (आगन्त) आवें और कार्य्य में सहयोग देवें तथा (मरुतः) हे बन्धु बान्धवो तथा (महि+देवि+अदिते) माननीय देवी माताओ ! (गिरा) सुन्दर वचन (ऋचा) और स्तुतिसहित होकर हमारे (सदने+पस्त्ये) स्थानों और गृहों में बैठें ॥५॥
Connotation: - जो छोट़े, बड़े, मूर्ख, विद्वान्, राजा और प्रजा यज्ञ में श्रद्धा से आवें, वे सब ही सत्कारयोग्य हैं ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

देव-सम्पर्क-प्राणसाधना- स्वास्थ्य

Word-Meaning: - [१] हे (विश्वे) = सब देवो! आप (सजोषसः) = समानरूप से प्रीतिपूर्वक कर्त्तव्य कर्मों का सेवन करनेवाले होते हुए (समनसः) = समान चित्त होकर (नः) = हमें (अद्य) = आज (आगन्ता) = प्राप्त होवो | हमारा देवों के साथ सम्पर्क हो, जो देव मिलकर प्रीतिपूर्वक कर्त्तव्य कर्मों को करते हैं तथा समान चित्तवाले होते हैं। [२] हे (मरुतः) = प्राणो ! तथा (महि) = अत्यन्त महत्त्वपूर्ण (देवि) = दिव्य गुणों की जननि (अदिते) = स्वास्थ्य की देवते! आप (ऋचा) = ज्ञान की वाणियों के साथ तथा (गिरा) = स्तुति-वाणियों के साथ सदने हमारे बैठने के स्थान (पस्त्ये) = इस गृह में [आगन्त] आओ।
Connotation: - भावार्थ- देवों के सम्पर्क में हमारा जीवन चले, हम स्वस्थ बनें, प्राणसाधना में प्रवृत्त हों, स्वाध्याय तथा स्तवन की वृत्तिवाले हों।

SHIV SHANKAR SHARMA

यज्ञे सर्वे पूजनीया इति दर्शयति।

Word-Meaning: - हे विश्वे=सर्वे विद्वांसः ! समनसः=समानमनस्काः=एकमनसो भूत्वा। सजोषसः=परस्परं समानकार्य्याय संगताश्च भूत्वा। अद्य=अस्मिन् दिने। नोऽस्मान्। आगन्त=आगच्छत। ततः। हे मरुतः=सर्वे सम्बन्धिनः ! यूयम्। गिरा+ऋचा=वाण्या स्तोत्रेण च सह। अपि च। हे महि=देवि अदिते ! सदने=स्थाने। पस्त्ये=गृहे च। उपविशत ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Red gird maruto devyadite sadane pastye mahi.$All powers of love and friendship of the world with equal mind may come in to us in our great halls and homes in response to our Rks, hymns of adoration, come all Maruts, friends and brave associates, great inviolable Aditi, motherly figures, come today.