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यदत्त्यु॑प॒जिह्वि॑का॒ यद्व॒म्रो अ॑ति॒सर्प॑ति । सर्वं॒ तद॑स्तु ते घृ॒तम् ॥

English Transliteration

yad atty upajihvikā yad vamro atisarpati | sarvaṁ tad astu te ghṛtam ||

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Pad Path

यत् । अत्ति॑ । उ॒प॒ऽजिह्वि॑का । यत् । व॒म्रः । अ॒ति॒ऽसर्प॑ति । सर्व॑म् । तत् । अ॒स्तु॒ । ते॒ । घृ॒तम् ॥ ८.१०२.२१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:102» Mantra:21 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:12» Mantra:6 | Mandal:8» Anuvak:10» Mantra:21


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

उपासना से विषयासक्ति का निराकरण

Word-Meaning: - [१] (यत्) = जिस को (उपजिह्विका) = जीभ की चञ्चल प्रकृति-चटोरापन (अति) = खा जाता है। अथवा (यत्) = जो (वम्रः) = सब पढ़े-लिखे का वमन कर डालनेवाला होकर (अति र्स्पति) - ज्ञानदीप्त हो उठे। [२] प्रभु की उपासना सब विषयासक्तियों को दूर कर देती है। उपासना से जीभ का चटोरापन दूर हो जाता है और ज्ञान की रुचि उत्पन्न हो जाती है।
Connotation: - भावार्थ- हमें जीभ का चटोरापन खा जाता है। ज्ञान में अरुचिवाले होकर हम अवारा से हो जाते हैं। उपासना सब विषयों को दूर करके हमें ज्ञानदीप्त बना देती है।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Whatever your flames of fire consume, whatever the fumes spread over, let all that be food for your dynamics of existence in evolution.