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इन्द्र॑ ज॒हि पुमां॑सं यातु॒धान॑मु॒त स्त्रियं॑ मा॒यया॒ शाश॑दानाम् । विग्री॑वासो॒ मूर॑देवा ऋदन्तु॒ मा ते दृ॑श॒न्त्सूर्य॑मु॒च्चर॑न्तम् ॥

English Transliteration

indra jahi pumāṁsaṁ yātudhānam uta striyam māyayā śāśadānām | vigrīvāso mūradevā ṛdantu mā te dṛśan sūryam uccarantam ||

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Pad Path

इन्द्र॑ । ज॒हि । पुमां॑सम् । या॒तु॒ऽधान॑म् । उ॒त । स्त्रिय॑म् । मा॒यया॑ । शाश॑दानाम् । विऽग्री॑वासः । मूर॑ऽदेवाः । ऋ॒द॒न्तु॒ । मा । ते । दृ॒श॒न् । सूर्य॑म् । उ॒त्ऽचर॑न्तम् ॥ ७.१०४.२४

Rigveda » Mandal:7» Sukta:104» Mantra:24 | Ashtak:5» Adhyay:7» Varga:9» Mantra:4 | Mandal:7» Anuvak:6» Mantra:24


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे ऐश्वर्यसम्पन्न परमात्मन् ! (पुमांसं, यातुधानं, जहि) अन्यायकारी दण्डनीय राक्षस को आप नष्ट करें (उत) और (मायया) जो वञ्चना करके (शाशदानाम्, स्त्रियम्) वैदिक धर्म को हानि पहुँचाती है, ऐसी स्त्री को (जहि) नष्ट करो, (मूरदेवाः) हिंसारूपी क्रिया से क्रीड़ा करनेवाले (विग्रीवासः, ऋदन्तु) ज्ञानेन्द्रियरहित हो जायँ, ताकि (ते) वे सब (उच्चरन्तम्, सूर्यम्, मा, दृशन्) ज्ञानरूप सूर्य के प्रकाश को न देख सकें ॥२४॥
Connotation: - इस मन्त्र में यह कथन किया है कि जो लोग मायावी और हिंसक होते हैं, वे शनैः-शनैः ज्ञानरहित होकर ऐसी मुग्धावस्था को प्राप्त हो जाते हैं कि फिर उनको सत्य और झूठ का विवेक नहीं रहता। परमात्मन् ! ऐसे दुराचारियों को आप ऐसी मोहमयी निशा में सुलायें कि वह संसार में जागृति को प्राप्त न्यायकारी सदाचारियों को दुःख न दें ॥२४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

व्यभिचारियों को मृत्युदण्ड

Word-Meaning: - पदार्थ- हे (इन्द्र) = ऐश्वर्यवन्! तू (यातुधानं पुमांस) = पीड़क पुरुष को और (मायया शाशदानाम्) = माया से प्रजा की नाशक (स्त्रियं उत) = स्त्री को भी (जहि) = दण्डित कर। (मूर- देवा:) = मूढ़ होकर विषयों में क्रीड़ा करनेवाले दुष्ट लोग (वि-ग्रीवासः) = बिना गर्दन के होकर (ऋदन्तु) = नष्ट हों। (ते) = वे (उत्चरन्तं) = उगते हुए (सूर्यं मा दृशन्) = सूर्य को भी न देख पावें ।
Connotation: - भावार्थ- राष्ट्र में व्यभिचार फैलानेवाले व्यभिचारी स्त्री पुरुषों को राजा मृत्युदण्ड देवे तथा प्रजा को पीड़ित करनेवाले व ठगनेवाले स्त्री पुरुषों को भी कठोर दण्ड दे।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे परमैश्वर्यशालिन् ! (पुमांसम्, यातुधानम्, जहि) न्यायमनाचरन्तं राक्षसं नाशय (उत) तथा (मायया) वञ्चनया (शाशदानाम्, स्त्रियम्) या वैदिकधर्मं विकरोति तां (जहि) दण्डय (मूरदेवाः) ये हिंसनक्रियया क्रीडन्तः (विग्रीवासः, ऋदन्तु) ग्रीवारहिता निबुद्धयः सन्तो गच्छन्तु तथा ते ते सर्वे (उच्चरन्तम्, सूर्यम्, मा, दृशन्) ज्ञानमयसूर्यस्य प्रकाशं मा द्राक्षुः ॥२४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, punish and eliminate the man demon. Punish and eliminate the woman demon who destroys by deception and crafty design. Let the stranglers of life who play with life and death lose their own throat and let them never see the rising sun.