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यो वो॑ देवा घृ॒तस्नु॑ना ह॒व्येन॑ प्रति॒भूष॑ति। तं विश्व॒ उप॑ गच्छथ ॥८॥

English Transliteration

yo vo devā ghṛtasnunā havyena pratibhūṣati | taṁ viśva upa gacchatha ||

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Pad Path

यः। वः॒। दे॒वाः॒। घृ॒तऽस्नु॑ना। ह॒व्येन॑। प्र॒ति॒ऽभूष॑ति। तम्। विश्वे॑। उप॑। ग॒च्छ॒थ॒ ॥८॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:52» Mantra:8 | Ashtak:4» Adhyay:8» Varga:15» Mantra:3 | Mandal:6» Anuvak:5» Mantra:8


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर अध्यापक और अध्ययन करनेवाले परस्पर कैसे वर्त्ताव करें, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (देवाः) पढ़ाने और उपदेश करनेवाले विद्वानो ! (यः) जो (घृतस्नुना) घृत के समान शुद्ध (हव्येन) लेने-देने योग्य वा प्रशंसित पढ़ने और सुनने से (वः) तुम लोगों को (प्रतिभूषति) प्रत्यक्षता से सुभूषित करता है (तम्) उसके (विश्वे) सब तुम लोग (उप, गच्छथ) समीप प्राप्त होओ ॥८॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! जो सत्य विद्यादान से सब तुम लोगों को सुभूषित करता है, उसे तुम सब प्रतिभूषित करो अर्थात् बदले में सुशोभित करो ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सात्त्विक भोजन, ज्ञान व दिव्यगुणों की प्राप्ति

Word-Meaning: - [१] हे (देवाः) = दिव्य गुणो ! (यः) = जो (वः) = आपको (घृतस्नुना) = ज्ञानदीप्ति को जीवन में क्षरित करनेवाले (हव्येन) = हव्य पदार्थों के सेवन से प्रतिभूषति अपने अन्दर अलंकृत करना चाहता है, (तम्) = उसको (विश्वे) = आप सब (उपगच्छथ) = प्राप्त होते हो। [२] आहार की शुद्धि के होने पर सत्व [अन्तःकरण] की शुद्धि होती है। इस शुद्ध अन्तःकरण में ज्ञान का प्रकाश प्राप्त होता है। ज्ञान के प्रकाश में सब दिव्यगुणों की प्राप्ति होती है। इसीलिए यहाँ हव्य को, सात्त्विक यज्ञशेषरूप में सेवित अन्न को घृतस्नु कहा है, ज्ञान को प्राप्त करानेवाला।
Connotation: - भावार्थ- हम हव्य पदार्थों का सेवन करें, उससे ज्ञान दीप्ति प्राप्त होगी और हम सब दिव्य गुणों के अधिष्ठान बन पायेंगे।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनरध्यापकाऽध्येतारः परस्परं कथं वर्तेरन्नित्याह ॥

Anvay:

हे देवा ! यो घृतस्नुना हव्येन वः प्रतिभूषति तं विश्वे यूयमुप गच्छथ ॥८॥

Word-Meaning: - (यः) (वः) युष्मान् (देवाः) अध्यापकोपदेष्टारः (घृतस्नुना) घृतमिव शुद्धेन (हव्येन) आदातुं दातुमर्हेण प्रशंसितेनाऽध्ययनेन श्रवणेन वा (प्रतिभूषति) प्रत्यक्षतयाऽलङ्करोति (तम्) (विश्वे) सर्वे (उप) (गच्छथ) ॥८॥
Connotation: - हे मनुष्या ! यः सत्येन विद्यादानेन सर्वान् युष्मान् भूषयति तं यूयं प्रतिभूषत ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O generous and brilliant scholars and leading lights of the world, whoever the person that invites you and honours you with homage of yajna seasoned and refined with fragrant materials overflowing with ghrta, come to him and bless him with light, sweetness and advancement in knowledge, honour and wealth of life.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

How should the teachers and the taught deal with one another-is told.

Anvay:

O teachers and preachers ! you all go to that man, who adorns you with admirable and butter like pure reading and hearing which is worth accepting and worth giving.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O men ! he, who adorns you with the gift of true knowledge, adorn or honor him well (to express your gratefulness to him.)

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे माणसांनो ! जो सत्य विद्येने तुम्हाला विभूषित करतो त्याला तुम्ही प्रतिभूषित करा. ॥ ८ ॥