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इ॒मं नो॑ अग्ने अध्व॒रं होत॑र्वयुन॒शो य॑ज। चि॒कि॒त्वान्दैव्यं॒ जन॑म् ॥१२॥

English Transliteration

imaṁ no agne adhvaraṁ hotar vayunaśo yaja | cikitvān daivyaṁ janam ||

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Pad Path

इ॒मम्। नः॒। अ॒ग्ने॒। अ॒ध्व॒रम्। होतः॑। व॒यु॒न॒ऽशः। य॒ज॒। चि॒कि॒त्वान्। दैव्य॑म्। जन॑म् ॥१२॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:52» Mantra:12 | Ashtak:4» Adhyay:8» Varga:16» Mantra:2 | Mandal:6» Anuvak:5» Mantra:12


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर मनुष्य कैसे राजा को करें, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (होतः) देनेवाले (अग्ने) अग्नि के समान वर्त्तमान राजन् ! आप (वयुनशः) उत्तम ज्ञान से (नः) हमारे (इमम्) इस (अध्वरम्) न नष्ट करने योग्य न्याय व्यवहार को (चिकित्वान्) जाननेवाले आप (दैव्यम्) विद्वानों से सत्कार को प्राप्त हुए (जनम्) शुभाचरणों से प्रसिद्ध जन को (यज) अच्छे प्रकार प्राप्त हों ॥१२॥
Connotation: - हे राजा प्रजाजन ! आप जो हमारे बीच शुभ गुणकर्मस्वभावयुक्त हो, उसी को राज्य करने में अच्छे प्रकार युक्त करो ॥१२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

यज्ञशीलता व देवत्व

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = अग्रेणी प्रभो ! (होत:) = [हुदाने] सब आवश्यक उपकरणों को प्राप्त करानेवाले प्रभो ! आप (नः) = हमारे (इमं अध्वरम्) = इस यज्ञ को (वयुनशः) = ज्ञान के क्रम से यज हमारे साथ संगत करिये। जितना-जितना ज्ञान अधिक हो, उतना-उतना हमारा जीवन यज्ञमय बनता चले । [२] हे प्रभो! आप इस (दैव्यं जनम्) = [ देव एव दैव्यः] देव वृत्तिवाले पुरुष को (चिकित्वान्) = [जानन्] जाननेवाले होइये, अर्थात् इसका पूरा ध्यान करिये। यह आप से रक्षित हुआ हुआ अपने देवत्व को अधिक विकसित करनेवाला बने ।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु ज्ञान देते हुए हमें यज्ञशील बनायें। हमारा रक्षण करते हुए हमें देवत्व के विकास में समर्थ करें।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्मनुष्याः कीदृशं राजानं कुर्य्युरित्याह ॥

Anvay:

हे होतरग्ने ! वयुनशो न इममध्वरं चिकित्वांस्त्वं दैव्यं जनं यज ॥१२॥

Word-Meaning: - (इमम्) (नः) अस्माकम् (अग्ने) पावक इव वर्त्तमान (अध्वरम्) अहिंसनीयं न्यायव्यवहारम् (होतः) दातः (वयुनशः) प्रज्ञानेन (यज) सङ्गच्छस्व (चिकित्वान्) ज्ञानवान् (दैव्यम्) विद्वद्भिः सत्कृतम् (जनम्) शुभाचरणैः प्रसिद्धम् ॥१२॥
Connotation: - हे राजप्रजाजन ! त्वं योऽस्माकं मध्ये शुभगुणकर्मस्वभावयुक्तः स्यात्तमेव राज्यकरणे सङ्गतं कुरु ॥१२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, leading light and majestic ruler, generous giver and highpriest of the yajnic order of humanity approved and honoured by enlightened people, you know the enlightened people and the peaceful non violent order. Pray take over, rule and administer this order of ours according to the people’s performance and the law.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What sort of man should be made a ruler - is told.

Anvay:

O donor and purifier like the fire ! knowing this inviolable just dealing with your admirable wisdom, associate with an enlightened person, honored by great scholars and famous on account of good character and conduct.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O men and officers of the State ! appoint that man for the administration of the State, who among us may be the person endowed with the best virtues, actions and temperament.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे राजा प्रजाजनांनो ! जो आमच्यामध्ये शुभ, गुण, कर्म स्वभावयुक्त असेल त्यालाच राज्य करण्यासाठी युक्त करा. ॥ १२ ॥