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दश॒ रथा॒न्प्रष्टि॑मतः श॒तं गा अथ॑र्वभ्यः। अ॒श्व॒थः पा॒यवे॑ऽदात् ॥२४॥

English Transliteration

daśa rathān praṣṭimataḥ śataṁ gā atharvabhyaḥ | aśvathaḥ pāyave dāt ||

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Pad Path

दश॑। रथा॑न्। प्रष्टि॑ऽमतः। श॒तम्। गाः। अथ॑र्वऽभ्यः। अ॒श्व॒थः। पा॒यवे॑। अ॒दा॒त् ॥२४॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:47» Mantra:24 | Ashtak:4» Adhyay:7» Varga:34» Mantra:4 | Mandal:6» Anuvak:4» Mantra:24


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर वह राजा अधिकार किसके लिये देवे, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे राजन् वा गृहस्थ लोगो ! जैसे (अश्वथः) भोजन करनेवाला बुद्धिमान् जन (पायवे) पालन के लिये (अथर्वभ्यः) नहीं हिंसा करनेवालों को (प्रष्टिमतः) नहीं इच्छा विद्यमान जिनमें उन (दश) सङ्ख्या से विशिष्ट (रथान्) वाहनों को और (शतम्) सौ (गाः) गौओं को (अदात्) देवे, वैसे आप भी दीजिये ॥२४॥
Connotation: - इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो राजा आदि जन पालन करने योग्य के लिये पशु रथ आदि के रक्षण के अधिकार को देते हैं, वे अच्छी सामग्री से युक्त होते हैं ॥२४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'पायु-अथर्वः' बनना

Word-Meaning: - [१] (अश्वथ:) = [protection] इन्द्रियाश्वों का रक्षण करनेवाले प्रभु (पायवे) = विषय वासनाओं व रोगों से अपना बचाव करनेवाले उपासक के लिये (दश) = दस (प्रष्टिमतः) = [प्रष्टि=side horse] प्रशस्त इन्द्रियरूप अश्वोंवाले (रथान्) = शरीर- रथों को (अदात्) = देते हैं। प्रभु ने यह शरीर-रथ हमें दिया है। इसमें दस इन्द्रियरूप घोड़े जुते हैं। ये सब घोड़े इस शरीर-रथ को सम्यक् प्रभु प्राप्ति के मार्ग पर ले चलनेवाले हैं। हमें इनका रक्षण करना है, ये विषयों की दल-दल में न फँस जाएँ। [२] ये प्रभु (अथर्वभ्यः) = [अथ अर्वाङ्] अन्तर्दृष्टिवाले पुरुषों के लिये (शतम्) = शतवर्ष पर्यन्त (गाः) = ज्ञान की वाणियों को देते हैं । अन्तर्दृष्टिवाले ये पुरुष सदा उत्कृष्ट ज्ञान को प्राप्त करते हैं ।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु दस इन्द्रियाश्वों से युक्त शरीर-रथों को व ज्ञान की वाणियों को प्राप्त कराते हैं।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनः स राजाऽधिकारं कस्मै दद्यादित्याह ॥

Anvay:

हे राजन् गृहस्थ वा ! यथाऽश्वथो मेधावी पायवेऽथर्वभ्यः प्रष्टिमतो दश रथाञ्छतं गा अदात्तथा त्वमपि देहि ॥२४॥

Word-Meaning: - (दश) (रथान्) (प्रष्टिमतः) प्रष्टयोऽनीप्सा विद्यन्ते येषु तान् (शतम्) (गाः) धेनूः (अथर्वभ्यः) अहिंसकेभ्यः (अश्वथः) योऽश्नुते सः (पायवे) पालनाय (अदात्) दद्यात् ॥२४॥
Connotation: - अत्र वाचकलुप्तोपमालङ्कारः। ये राजादयो जनाः पालनार्हाय पशुरथादिरक्षणाऽधिकारं ददति ते सुसामग्रीयुक्ता भवन्ति ॥२४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Let the treasurer give ten chariots equipped with powerful steer and motive force to the guard and a hundred cows for the non-violent scholars of the physical and spiritual sciences of the Atharva Veda tradition.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Whom should the king delegate power-is told.

Anvay:

O king or householder! as a wise and" virtuous householder, who unites all, who gives to the sages of non-violent nature, for nourishment and feeding ten chariots and a hundred cows, which are in his possession, so you should also give.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Those kings and officers of the State, who delegate powers for providing food, cows, chariots etc. to others, in turn get good materials.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जे राजे पालन करणाऱ्यांना पशू, रथ इत्यादींच्या रक्षणाचा अधिकार देतात त्यांना चांगली सामग्री प्राप्त होते. ॥ २४ ॥