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यदज्ञा॑तेषु वृ॒जने॒ष्वासं॒ विश्वे॑ स॒तो म॒घवा॑नो म आसन् । जि॒नामि॒ वेत्क्षेम॒ आ सन्त॑मा॒भुं प्र तं क्षि॑णां॒ पर्व॑ते पाद॒गृह्य॑ ॥

English Transliteration

yad ajñāteṣu vṛjaneṣv āsaṁ viśve sato maghavāno ma āsan | jināmi vet kṣema ā santam ābhum pra taṁ kṣiṇām parvate pādagṛhya ||

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Pad Path

यत् । अज्ञा॑तेषु । वृ॒जने॑षु । आस॑म् । विश्वे॑ । स॒तः । म॒घऽवा॑नः । मे॒ । आ॒स॒न् । जि॒नामि॑ । वा॒ । इत् । क्षेमे॑ । आ । सन्त॑म् । आ॒भुम् । प्र । तम् । क्षि॒णा॒म् । पर्व॑ते । पा॒द॒ऽगृह्य॑ ॥ १०.२७.४

Rigveda » Mandal:10» Sukta:27» Mantra:4 | Ashtak:7» Adhyay:7» Varga:15» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:2» Mantra:4


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यत्) जिससे (अज्ञातेषु वृजनेषु) अन्यों के द्वारा न जानने योग्य बलों में (आसम्) मैं वर्त्तमान हूँ (मे-सतः-मघवानः-आसन्) उस मेरी प्राप्ति के लिये अध्यात्मयज्ञ करनेवाले उपासक हैं (वा-इत्) और (क्षेमे) उपासकों के कल्याणनिमित्त (आभुं सन्तम्) आक्रमणकारी महान् पाप या  पापी को (जिनामि) निर्बल करता हूँ-दबाता हूँ (तं पादगृह्य पर्वते प्रक्षिणाम्) उसे पैरों में बाँध जैसे निष्क्रिय करके पर्ववाले विषम स्थान-गहन कष्टमय स्थान में फैंकता हूँ-नष्ट करता हूँ ॥४॥
Connotation: - परमात्मा के बल अनन्त हैं, जो कि मनुष्यों द्वारा न जानने योग्य हैं। अध्यात्मयज्ञ करनेवाले उपासक उसे जानते हैं-मानते हैं। उसके कल्याण के निमित्त आक्रमणकारी पाप और पापी को अपने अज्ञात बलों से वह नष्ट-भ्रष्ट कर देता है ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मघवान् का रक्षण, आयु का परिचय

Word-Meaning: - [१] (यद्) = जब (अज्ञातेषु वृजनेषु) = अज्ञात संग्रामों में 'किसका विजय होगा, किसका नहीं ' इस बात का जिनमें पता नहीं, ऐसे युद्धों में आसम्-मैं होता हूँ, अर्थात् जब इन संग्रामों में युद्ध करते हुए ये लोग मेरा स्मरण करते हैं तो विश्वे मघवान :- सब ऐश्वर्यशाली यज्ञशील [मघ- मख] पुरुष (सतः मे) = सर्वत्र वर्तमान मेरे (आसन्) = होते हैं, अर्थात् जो अपने ऐश्वर्यों का विनियोग यज्ञों में करते हैं उनका मैं रक्षण करता हूँ [२] और (क्षेमे) = जगत् के कल्याण के निमित्त (आसन्तम्) = चारों ओर होनेवाले, अर्थात् सर्वत्र अपना पैर फैलानेवाले (आभुम्) = सारे चीजों को प्राप्त करने के प्रयत्नवाले परिग्रही (तम्) = उस पुरुष को (पादगृह्य) = पाओं से पकड़ के (पर्वते प्रक्षिणाम्) = पर्वत पर फेंक देता हूँ, पहुँचा देता हूँ, अर्थात् ऐसे पुरुष को मैं सुदूर विनष्ट कर देता हूँ। [३] युद्ध होता है, और युद्ध में धर्म्य पक्षवाले को प्रभु विजयी करते हैं। अधर्म के पक्ष का विनाश होता है। इसे प्रभु सुदूर फेंक-सा देते हैं ।
Connotation: - भावार्थ - ऐश्वर्यों का यज्ञों में विनियोग करनेवालों का प्रभु रक्षण करते हैं और परिग्रही आसुरी वृत्तिवालों का विनाश। इस प्रकार ही प्रभु संसार का कल्याण करते हैं ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यत्) यतः (अज्ञातेषु वृजनेषु) अन्यैरज्ञातेष्वज्ञातव्येषु बलेषु (आसम्) अहं वर्त्तमानोऽस्मि (मे सतः-मघवानः-आसन्) तादृशभूतस्य मम प्राप्तये यज्ञवन्तोऽध्यात्मयज्ञं कुर्वाणा उपासका भवन्ति सन्ति (वा-इत्) अथ चैव (क्षेमे) उपासकानां कल्याणनिमित्तं “निमित्तसप्तमी” (आभुं सन्तम्) तमाभवन्तम् आक्रमणकारिणं महत्पापं पापिनं वा (जिनामि) अभिभवामि निर्बलीकरोमि पुनश्च (तं पादगृह्य पर्वते प्रक्षिणाम्) पादौ गृहीत्वेव पर्ववति विषमस्थाने प्रक्षिपामि सञ्चूर्णयामि ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - When I am in regions and battles unknown, all existent holy powers are around me. Then in the interest of the good of the world I defeat all negative powers and, catching them by the root, I throw them on the rocks.