Go To Mantra
Viewed 396 times

अ॒स्माक॑मू॒र्जा रथं॑ पू॒षा अ॑विष्टु॒ माहि॑नः । भुव॒द्वाजा॑नां वृ॒ध इ॒मं न॑: शृणव॒द्धव॑म् ॥

English Transliteration

asmākam ūrjā ratham pūṣā aviṣṭu māhinaḥ | bhuvad vājānāṁ vṛdha imaṁ naḥ śṛṇavad dhavam ||

Mantra Audio
Pad Path

अ॒स्माक॑म् । ऊ॒र्जा । रथ॑म् । पू॒षा । अ॒वि॒ष्टु॒ । माहि॑नः । भुव॑त् । वाजा॑नाम् । वृ॒धः । इ॒मम् । नः॒ । शृ॒ण॒व॒त् । हव॑म् ॥ १०.२६.९

Rigveda » Mandal:10» Sukta:26» Mantra:9 | Ashtak:7» Adhyay:7» Varga:14» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:2» Mantra:9


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (माहिनः पूषा) महान् पोषक परमात्मा (अस्माकं रथम्) हमारे अभीष्ट या हमारे लिये रमणीय मोक्ष को (ऊर्जा-अविष्टु) अपने शाश्वतिक ज्ञानबल से सुरक्षित रखे-रखता है (वाजानां वृधः-भुवत्)  वह अमृत अन्न भोगों का बढ़ानेवाला हो-है (नः-इमं हवं शृणवत्) हमारे इस प्रार्थना वचन को सुने-स्वीकार करे-स्वीकार करता है ॥९॥
Connotation: - परमात्मा महान् पोषक है। वह अपने शाश्वतिक ज्ञानबल से हमारे लिये मोक्ष को प्रदान करता है और विविध अमृतान्न भोगों का बढ़ानेवाला हमारी प्रार्थना को स्वीकार करनेवाला है ॥९॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

रथ का रक्षण

Word-Meaning: - [१] इस जीवन-यात्रा में गत मन्त्र के अनुसार जब अज बनकर हम शरीर- रथ की धुरा का आवर्तन करें तो वे (पूषा) = सबका पोषण करनेवाले, (माहिनः) = महिमा सम्पन्न प्रभु (अस्माकं रथम्) = हमारे इस शरीर - रथ को ऊर्जा बल व प्राणशक्ति के द्वारा (अविष्टु) = रक्षित करें। उस प्रभु के रक्षण में ही हमारे लिये किसी भी प्रकार की उन्नति का सम्भव होता है । [२] वे प्रभु (वाजानाम्) = हमारी शक्तियों के (वृधः) = वर्धन करनेवाले (भुवत्) = हों । शक्ति-वर्धन के द्वारा ही रक्षण होता है । शक्ति हास ही विनाश का मार्ग है। [३] वे प्रभु (नः) = हमारी (इमं हवम्) = इस प्रार्थना को (शृणवत्) = अवश्य सुनें। हमारी प्रार्थना न सुनने योग्य, न समझी जाए। पुरुषार्थ से हम अपने को पात्र बनायें जिससे प्रभु हमारी प्रार्थना को अवश्य पूर्ण करें ।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु ही हमारे शरीर रथ के रक्षक हैं, वे ही हमारी शक्तियों का वर्धन करते हैं । सूक्त का प्रारम्भ स्पृहणीय बुद्धियों की प्राप्ति की कामना से होता है । [१] इन बुद्धियों से हम सर्वत्र जलवायु में उस प्रभु की महिमा का अनुभव करते हैं, [२] ये प्रभु ही हमारा पोषण व हमारे पर सुखों का वर्षण करते हैं, [३] हमारी बुद्धियों को सिद्ध करते हैं, [४] वे हमारे सच्चे मित्र हैं, [५] हमारा शोधन करते हैं, [६] मलों का अपहरण करते हैं, [७] इस प्रकार हमें शरीर - रथ की धुरा के वहन के योग्य बनाते हैं, [८] वे ही हमारी सब शक्तियों को बढ़ाते हैं, [९] वे प्रभु यजमान यज्ञशील को ही शक्तिशाली बनाते हैं।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (माहिनः पूषा) महान् पोषयिता परमात्मा (अस्माकं रथम्) अस्माकमभीष्टं यद्वाऽस्मभ्यम् “चतुर्थ्यर्थे बहुलं छन्दसि” [अष्टा० २।३।६३] षष्ठी रमणीयं मोक्षम् (ऊर्जा-अविष्टु) स्वकीयेन शाश्वतिकज्ञानबलेन रक्षतु (वाजानां वृधः भुवत्) सोऽमृतान्नभोगानाम् “अमृतोऽन्नं वै वाजः” [जै० २।१९२] वर्धको भवेत् (नः इमं हवं शृणवत्) अस्माकमिदं प्रार्थनावचनं शृणुयात् ॥९॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May the mighty Pusha power and protect our chariot of life with divine energy, may the lord be promoter and augmenter of our food, energy and onward progress, and may he listen and grant this prayer of ours.