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अ॒स्य प्र जा॒तवे॑दसो॒ विप्र॑वीरस्य मी॒ळ्हुष॑: । म॒हीमि॑यर्मि सुष्टु॒तिम् ॥
English Transliteration
Mantra Audio
asya pra jātavedaso vipravīrasya mīḻhuṣaḥ | mahīm iyarmi suṣṭutim ||
Pad Path
अ॒स्य । प्र । जा॒तऽवे॑दसः । विप्र॑ऽवीरस्य । मी॒ळ्हुषः॑ । म॒हीम् । इ॒य॒र्मि॒ । सु॒ऽस्तु॒तिम् ॥ १०.१८८.२
Rigveda » Mandal:10» Sukta:188» Mantra:2
| Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:46» Mantra:2
| Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:2
BRAHMAMUNI
Word-Meaning: - (अस्य) इस (जातवेदसः) पूर्वोक्त परमात्मा या अग्नि (विप्रवीरस्य) मेधावी प्राप्त करनेवाला जिसका है, उस ऐसे (मीढुषः) सुख सींचनेवाले की (महीं स्तुतिम्) महती स्तुति या प्रशंसा को (इयर्मि) प्रेरित करता हूँ या प्रशंसा करता हूँ ॥२॥
Connotation: - मेधावी द्वारा प्राप्त होनेवाले सुखवर्षक परमात्मा की महती स्तुति करनी चाहिए तथा अग्नि का उपयोग कर लाभ लेना चाहिये ॥२॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
स्तवन से लक्ष्यदृष्टि की उत्पत्ति
Word-Meaning: - [१] (अस्य) = इस (जातवेदसः) = सर्वव्यापक-सर्वज्ञ-जातधन, (विप्रवीरस्य) = विप्रों में वीर, ज्ञानियों में श्रेष्ठ, (मीढुषः) = सुखों का वर्षण करनेवाले प्रभु के (महीं सुष्टुतिम्) = महान् स्तवन को (प्र इयर्मि) = प्रकर्षेण अपने में प्रेरित करता हूँ । [२] यह प्रभु का स्तवन हमारे सामने भी जीवन के लक्ष्य को उपस्थित करता है। हमें भी उस प्रभु की तरह ज्ञानी, विप्रवीर व सुखों का वर्षण करनेवाला बनना है।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु-स्तवन से हमारे में भी प्रभु जैसा बनने का भाव उत्पन्न होगा।
BRAHMAMUNI
Word-Meaning: - (अस्य जातवेदसः) एतस्य पूर्वोक्तस्य परमात्मनो यद्वाग्नेः (विप्रवीरस्य) विप्रो मेधावी वीरः प्रापयिता यस्य तथाभूतस्य (मीढुषः) सुखसेचकस्य (महीं स्तुतिम्-इयर्मि) महतीं स्तुतिं प्रेरयामि यद्वा प्रशंसां करोमि ॥२॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - I raise my holy song of high adoration in honour of this Jataveda Agni, generous, virile and creative favourite of the brave and pioneering leading spirits of humanity.
