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यः पर॑स्याः परा॒वत॑स्ति॒रो धन्वा॑ति॒रोच॑ते । स न॑: पर्ष॒दति॒ द्विष॑: ॥

English Transliteration

yaḥ parasyāḥ parāvatas tiro dhanvātirocate | sa naḥ parṣad ati dviṣaḥ ||

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Pad Path

यः । पर॑स्याः । प॒रा॒ऽवतः॑ । ति॒रः । धन्व॑ । अ॒ति॒ऽरोच॑ते । सः । नः॒ । प॒र्ष॒त् । अति॑ । द्विषः॑ ॥ १०.१८७.२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:187» Mantra:2 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:45» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:2


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यः) जो परमेश्वर (परस्याः) परदिशा से (परावतः) दूर देश से (धन्व) अन्तरिक्ष में (तिरः) विस्तीर्ण हुआ (अतिरोचते) बहुत प्रकाशित हो रहा है, (स-नः०) पूर्ववत् ॥२॥
Connotation: - परमात्मा के लिए कोई दिशा या देश दूर नहीं है, वह हृदयाकाश में अत्यन्त प्रकाशित रहता है, द्वेष करनेवाले शत्रुओं को दूर रखता है ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सर्वत्र रोचमान प्रभु

Word-Meaning: - [१] (यः) = जो प्रभु (परस्याः परावतः) = दूर से दूर स्थान में स्थित हुए हुए भी (धन्व) = सम्पूर्ण अन्तरिक्ष को (तिर:) = [cross wise] एक सिरे से दूसरे सिरे तक (अतिरोचते) = अतिशयेन प्रकाशित कर रहे हैं, (स) = वे प्रभु (नः) = हमें (द्विषः) = सब द्वेषवृत्तियों से (अतिपर्षत्) = पार ले जायें। [२] सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में उस एक प्रभु का ही शासन है, हम सब उस प्रभु की ही प्रजा हैं। यह चिन्तन हमें परस्पर प्रेमवाला बनाता है, इस प्रेम में हम सर्वत्र प्रभु का प्रकाश देखते हैं।
Connotation: - भावार्थ - सर्वत्र प्रभु के प्रकाश को देखते हुए हम द्वेष से ऊपर उठें।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यः परस्याः परावतः) यः परमेश्वरः परस्यादिशो दूरदेशाच्च (धन्व तिरः-अतिरोचते) अन्तरिक्षे “धन्व-अन्तरिक्षनाम” [निघ० १।३] “सुपां सुलुक्” [अष्टा० ७।१।३९] इति ङिविभक्तेर्लुक्, विस्तीर्णः सन् बहु प्रकाशते (स नः० ) पूर्ववत् ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni who pervades and shines beatific from far and farther, over the deserts and across the spaces, casts away all our jealous, malignant and enemy forces, and washes us clean and immaculate.