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ऋ॒ष॒भं मा॑ समा॒नानां॑ स॒पत्ना॑नां विषास॒हिम् । ह॒न्तारं॒ शत्रू॑णां कृधि वि॒राजं॒ गोप॑तिं॒ गवा॑म् ॥

English Transliteration

ṛṣabham mā samānānāṁ sapatnānāṁ viṣāsahim | hantāraṁ śatrūṇāṁ kṛdhi virājaṁ gopatiṁ gavām ||

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Pad Path

ऋ॒ष॒भम् । मा॒ । स॒मा॒नाना॑म् । स॒ऽपत्ना॑नाम् । वि॒ऽस॒स॒हिम् । ह॒न्तार॑म् । शत्रू॑णाम् । कृ॒धि॒ । वि॒ऽराज॑म् । गोऽप॑तिम् । गवा॑म् ॥ १०.१६६.१

Rigveda » Mandal:10» Sukta:166» Mantra:1 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:24» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:1


BRAHMAMUNI

इस सूक्त में राजा सैन्य शरीर मन आत्मबलों से युक्त हो, राष्ट्रद्रोही जनों की वृत्तिपरम्परा से प्राप्त क्षेम का राष्ट्रियकरण हो, विशेष दण्ड देकर भी प्रजा का रक्षण करना चाहिए, इत्यादि विषय हैं।

Word-Meaning: - (समानानाम्) समानगुणकर्मवालों के मध्य में (मा-ऋषभम्) मुझे श्रेष्ठ (सपत्नानां विषासहिम्) विरोधयों का अभिभव करनेवाला-दबानेवाला (शत्रूणां हन्तारम्) नाश करनेवालों का मारनेवाला (गवां विराजम्) भूमियों के मध्य विशेष राजमान (गोपतिम्) भूमि का स्वामी (मां कृधि) परमात्मा मुझे कर दे ॥१॥
Connotation: - राजा को समान गुण कर्मवालों के मध्य श्रेष्ठ होना चाहिए, विरोधियों का दबानेवाला, शत्रुओं का नाशक, राष्ट्रभूमियों का स्वामी व प्रजाओं का रक्षक होना चाहिये ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

गवां गोपति

Word-Meaning: - [१] हे प्रभो ! (मा) = मुझे (समानानाम्) = अपने समान लोगों में, एक श्रेणी में स्थित व्यक्तियों में (ऋषभम्) = श्रेष्ठ कृधि = करिये। मैं समान लोगों में आगे बढ़ जानेवाला बनूँ। इसी दृष्टिकोण से मुझे (सपत्नानाम्) = मेरे शरीर के पति बनने की कामनावाले इन मेरे सपत्नभूत काम-क्रोध आदि का (विषासहिम्) = विशेषरूप से पराभव करनेवाला करिये। तथा (शत्रूणाम्) = शरीर को विनष्ट करनेवाले विविध रोगरूप शत्रुओं का (हन्तारम्) = मारनेवाला करिये, हम रोगों से कभी आक्रान्त न हों। जब हम शरीर में नीरोग होते हैं और मन में वासनाओं से ऊपर उठ जाते हैं तभी उन्नतिपथ पर आगे बढ़ते हुए समान लोगों में श्रेष्ठ बन पाते हैं। [२] रोगों व वासनाओं से ऊपर उठाकर मुझे (विराजम्) = विशिष्ट दीप्तिवाला (कृधि) = करिये। मेरा शरीर तेजस्विता से दीप्त हो तथा मेरा मन निर्मलता से चमक उठे। मुझे (गवां गोपतिम्) = इन्द्रियरूप गौओं का (पति) = स्वामी बनाइये । इन्द्रियों को मैं वश में करनेवाला होऊँ । जितेन्द्रियता ही वस्तुतः सब उन्नतियों का आधार है । अजितेन्द्रिय न रोगों से बच पाता है, न वासनाओं से। यह विराट् तो क्या, एकदम निस्तेज होकर मृत्यु की ओर अग्रसर होता है ।
Connotation: - भावार्थ - मैं जितेन्द्रिय बनूँ । विशिष्ट दीप्तिवाला बनकर वासनाओं को विनष्ट करूँ और नीरोग बनूँ । इस प्रकार मैं अपने समान लोगों में श्रेष्ठ होऊँ ।

BRAHMAMUNI

अत्र सूक्ते राजा सैन्यशरीरमनआत्मबलैर्युक्तः स्यात्, राष्ट्रविद्रोग्धृ-जनानां वृत्तेः परम्परातः क्षेमस्य स्वायत्तीकरणे विशिष्टदण्डप्रदानं च तेभ्यो दातव्यं प्रजारक्षणं च कार्यमित्येवं विषयाः सन्ति।

Word-Meaning: - (समानानां मा-ऋषभम्) समानगुणकर्मवतां मध्ये श्रेष्ठम् (सपत्नानां विषासहिम्) विरोधिनामभिभवितारम् (शत्रूणां हन्तारम्) शातयि-तॄणां हन्तारम् (गवां विराजं गोपतिम्) भूमीनां विशेषेण राजमानं भूमिस्वामिनम् (मां कृधि) परमात्मन् मां कुरु ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Make me brave and generous among equals, challenger of rivals and adversaries, subduer of enemies, and brilliant leader, protector and promoter of lands, cows and culture of the peoples of the earth.