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ऊ॒रुभ्यां॑ ते अष्ठी॒वद्भ्यां॒ पार्ष्णि॑भ्यां॒ प्रप॑दाभ्याम् । यक्ष्मं॒ श्रोणि॑भ्यां॒ भास॑दा॒द्भंस॑सो॒ वि वृ॑हामि ते ॥

English Transliteration

ūrubhyāṁ te aṣṭhīvadbhyām pārṣṇibhyām prapadābhyām | yakṣmaṁ śroṇibhyām bhāsadād bhaṁsaso vi vṛhāmi te ||

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Pad Path

ऊ॒रुऽभ्या॑म् । ते॒ । अ॒ष्ठी॒वत्ऽभ्या॑म् । पार्ष्णि॑ऽभ्याम् । प्रऽप॑दाभ्याम् । यक्ष्म॑म् । श्रोणि॑ऽभ्य्म् । भास॑दात् । भंससः॑ । वि । वृ॒हा॒मि॒ । ते॒ ॥ १०.१६३.४

Rigveda » Mandal:10» Sukta:163» Mantra:4 | Ashtak:8» Adhyay:8» Varga:21» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:12» Mantra:4


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (ते) हे रोगी ! तेरे (उरुभ्याम्) दोनों जङ्घाओं से (अष्ठीवद्भ्याम्) दोनों घुटनों से (पार्ष्णिभ्याम्) दोनों एड़ियों से (प्रपदाभ्याम्) दोनों पञ्जों से (श्रोणिभ्याम्) दोनों कूल्हों से (भासदात्) जङ्घा की हड्डी से (भंससः) गुप्त स्थान से (ते) तेरे (यक्ष्मं वि वृहामि) रोग को दूर करता हूँ ॥४॥
Connotation: - मन्त्रों में कहे उक्त अङ्गों से रोग को हटाना चाहिये ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

जंघादि दोष निवारण

Word-Meaning: - [१] हे यक्ष्मगृहीत! (ते ऊरुभ्याम्) = तेरी जंघाओं से, (अष्ठीवद्भ्याम्) = घुटनों से, (पार्ष्णिभ्याम्) = एड़ियों से (प्रपदाभ्याम्) = पञ्जों से यक्ष्मम्-रोग को विवृहामि उन्मूलित करता हूँ। [२] ते-तेरे श्रोणिभ्याम् - नितम्ब भागों से [ hips ] भासदात्-कटि भाग से भंससः - गुदा के प्रदेश से रोग को उखाड़ फेंकता हूँ ।
Connotation: - भावार्थ - उदर के निचले प्रदेशों से मैं तेरे रोगों को दूर करता हूँ ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (ते) तव (ऊरुभ्याम्) जङ्घाभ्याम् (अष्ठीवद्भ्याम्) जानुभ्याम् (पार्ष्णिभ्याम्) पादजङ्घासन्धिस्थानाभ्याम् (प्रपदाभ्याम्) पादाग्राभ्याम् (श्रोणिभ्याम्) जङ्घाकटिसन्धिभ्याम् (भासदात्) जङ्घामध्यस्थानात् (भंससः) गुप्तस्थानात् (यक्ष्मं वि वृहामि) रोगं तव निस्सारयामि ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - I uproot the cancerous disease from your thighs, knees, heels, forefeet, hips, lower back and groin.