Go To Mantra
Viewed 81 times

इषु॑रिव दि॒ग्धा नृ॑पते पृदा॒कूरि॑व गोपते। सा ब्रा॑ह्म॒णस्येषु॑र्घो॒रा तया॑ विध्यति॒ पीय॑तः ॥

Mantra Audio
Pad Path

इषु:ऽइव । दिग्धा । नृऽपते । पृदाकू:ऽइव । गोऽपते । सा । ब्राह्मणस्य । इषु: । घोरा । तया । विध्यति । पीयत: ॥१८.१५॥

Atharvaveda » Kand:5» Sukta:18» Paryayah:0» Mantra:15


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

वेदविद्या की रक्षा का उपदेश।

Word-Meaning: - (नृपते) हे नरपालक ! (गोपते) हे भूमिपालक ! (दिग्धा) विष में भरे (इषुः इव) बाण के समान और (पृदाकूः इव) फुँफकारती हुई साँपिनी के समान (सा) वह (ब्राह्मणस्य) ब्राह्मण की (घोर) भयानक (इषुः) बरछी है, (तया) उस से (पीयतः) सतानेवालों को (विध्यति) वह छेदता है ॥१५॥
Connotation: - नीतिकुशल राजा के राज्य में वेदवेत्ता लोग विद्या के प्रभाव से शत्रुओं को नाश करते हैं ॥१५॥
Footnote: १५−(इषुः) बाणः (इव) यथा (दिग्धा) विषासक्ता (नृपते) हे नरपालक (पृदाकूः) कुत्सितशब्द-कारिणी सर्पिणी (इव) (गोपते) हे भूरक्षक (सा) पूर्वोक्ता गौर्वाणी (ब्राह्मणस्य) वेदवेत्तुः (इषुः) हननशक्तिः। अस्त्रभेदः (घोरा) कराला (तया) इष्वा (विध्यति) छिनत्ति (पीयतः) पीय हिंसायाम्−शतृ। हिंसाशीलान् ॥