PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
गृहआश्रम का उपदेश।
Word-Meaning: - (सूर्यायै)बुद्धिमानों का हित करनेवाली विद्या के लिये, (देवेभ्यः) उत्तम गुणों के पाने केलिये (च) और (वरुणाय) श्रेष्ठ (मित्राय) मित्र की प्राप्ति के लिये (ये) जोपुरुष (भूतस्य) उचित कर्म के (प्रचेतसः) जाननेवाले हैं, (तेभ्यः) उनके लिये (इदम्) यह (नमः) नमस्कार (अकरम्) करता हूँ ॥४६॥
Connotation: - जो मनुष्य विद्याप्राप्त करके उत्तम गुणों और श्रेष्ठ मित्रों को प्राप्त करते हैं, वे संसार मेंप्रशंसनीय होते हैं ॥४६॥यह मन्त्र कुछ भेद से ऋग्वेद में है−१०।८५।१७ ॥
Footnote: ४६−(सूर्यायै) सूराः सूरयो वा मेधाविनः, तेभ्यो हिता, सूर सूरि वा-यत्। सूर्यावाङ्नाम-निघ० १।११। विद्याप्राप्तये (देवेभ्यः) उत्तमगुणानां लाभाय (मित्राय)मित्रलाभाय (वरुणाय) वरणीयाय श्रेष्ठाय (च) (ये) विद्वांसः (भूतस्य) उचितकर्मणः (प्रचेतसः) प्रज्ञातारः (तेभ्यः) (इदम्) (अकरम्) करोमि (नमः) नमस्कारम् ॥
