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सु॑मङ्ग॒लीप्र॒तर॑णी गृ॒हाणां॑ सु॒शेवा॒ पत्ये॒ श्वशु॑राय शं॒भूः। स्यो॒ना श्व॒श्र्वै प्रगृ॒हान्वि॑शे॒मान् ॥

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Pad Path

सुऽमङ्गली । प्रऽतरणी । गृहाणाम् । सुऽशेवा । पत्ये । श्वशुराय । शम्ऽभू: । स्योना । श्वश्वै । प्र । गृहान् । विश । इमान् ॥२.२६॥

Atharvaveda » Kand:14» Sukta:2» Paryayah:0» Mantra:26


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

गृहआश्रम का उपदेश।

Word-Meaning: - [हे वधू !] (सुमङ्गली)बड़ी मङ्गलवाली, (गृहाणाम्) घरों [घरवालों] की (प्रतरणी) बढ़ानेवाली, (पत्ये)पति के लिये (सुशेवा) बड़ी सुख देनेवाली, (श्वशुराय) ससुर के लिये (शंभूः)शान्ति देनेवाली और (श्वश्र्वै) सासु के लिये (स्योना) आनन्द देनेवाली तू (इमान्गृहान्) इन घरों [अर्थात् गृहकार्य्यों] में (प्र विश) प्रवेश कर ॥२६॥
Connotation: - वधू को योग्य है कि सबप्रकार चतुर होकर घरवालों की उन्नति करती हुई पति, सासु, ससुर आदि को प्रसन्नरखकर घर के कामों में प्रवेश करे ॥२६॥मन्त्र २६ और २७ महर्षिदयानन्दकृतसंस्कारविधि गृहाश्रमप्रकरण में व्याख्यात् हैं ॥
Footnote: २६−(सुमङ्गली) बहुमङ्गलवती (प्रतरणी) वर्धयित्री (गृहाणाम्) गृहपुरुषाणाम् (सुशेवा) बहुसुखदात्री (पत्ये) (श्वशुराय) पतिजनकाय (शंभूः) शान्तिप्रदा (स्योना) सुखप्रदा (श्वश्र्वै)पतिजनन्यै (गृहान्) गृहकार्याणि (प्र विश) (इमान्) ॥